फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रुस्तमपुर ओवरब्रिज को जीडीए बोर्ड की मंजूरी 

Tue, 15 Mar 2016 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
जीडीए सभागार में बोर्ड की बैठक को संबोधित करते कमिश्नर साथ में जीडीए बीसी, डीएम। - फोटो : shivharsh
विज्ञापन

विज्ञापन
जाम से निजात की दिशा में सोमवार को जीडीए बोर्ड की बैठक में तीन महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। रुस्तमपुर ओवरब्रिज को जहां बोर्ड ने अपनी मंजूरी दे दी वहीं पार्किंग को लेकर कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस भेज खामोश हो गए अफसरों पर सख्ती की गई है। कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद के निर्देश पर प्रवर्तन दल में शामिल सभी एई और जेई का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। इन सभी का उत्तरदायित्व तय करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

इसी तरह अब जीडीए से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही सीएमओ नर्सिंग होम और हॉस्पिटल को लाइसेंस जारी करेंगे। शहर में करीब 80 ऐसे नर्सिंग होम हैं जिन्होंने अभी तक जीडीए में पूर्णता प्रमाण पत्र ही नहीं जमा किया है। इन वजहों से भी शहर में जाम की समस्या खड़ी होती है।
विज्ञापन


दिसंबर 2015 में शहर में आए मुख्यमंत्री ने मोहद्दीपुर के साथ ही रुस्तमपुर ओवरब्रिज की भी घोषणा की थी। तभी से इसकी तैयारी चल रही थी। कमिश्नर की पहल पर इसे जीडीए बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल किया गया और बोर्ड ने इसे स्वीकृत भी कर दिया। तय हुआ कि इसके निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये प्राधिकरण निधि और 10 करोड़ अवस्थापना मद से खर्च किया जाएगा। जीडीए उपाध्यक्ष शिव श्याम मिश्रा ने बताया कि जल्द ही कार्यदायी संस्था का चयन कर सर्वे और फिर निर्माण का काम शुरू करा दिया जाएगा।

इसी तरह जाम से निजात की दिशा में दिसंबर 2015 में बने एक्शन प्लान के तहत जीडीए ने शहर के कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच कराई थी। इसमें पाया गया था कि कुछ प्रतिष्ठानों के पास पार्किंग तो है पर वे उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे, जबकिे कुछ के पास पार्किंग ही नहीं है। कई पार्किंग वाली जगह का व्यावसायिक इस्तेमाल करते पाए गए थे।

ऐसे 74 व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को जीडीए की तरफ से नोटिस भेजा गया था। जिनके पास पार्किंग है और वे उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे उन्हें 15 दिन तो जिनके पास पार्किंग ही नहीं है उन्हें बंदोबस्त करने के लिए एक महीने की मोहलत दी गई मगर मियाद बीतने के बाद भी जीडीए ने कोई कार्रवाई नहीं की। बोर्ड बैठक में कमिश्नर ने इसपर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रवर्तन दल में शामिल सभी एई और जेई का वेतन रोकने का निर्देश दिया।  दो कालोनियां हैंडओवर, दो और की तैयारी रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र स्थित सिद्धार्थ एन्क्लेव और सिद्धार्थ एन्क्लेव विस्तार में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। लंबी कवायद के बाद सोमवार को बोर्ड बैठक में जीडीए की इन दोनों कालोनियों को नगर निगम को हैंडओवर कर दिया गया। अब यहां के लोगों को बिजली, पानी और सफाई आदि की मूलभूत सुविधाओं के लिए एक से दूसरे दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि इन दोनों कालोनियों का सर्वे कराकर वहां की सभी खामियों को दूर कर दिया गया था।

इसी तरह अब अगले चरण में दो और कालोनियों को भी हैंडओवर करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। ललितापुरम आवासीय योजना और बुद्ध विहार पार्ट ए की खामियों को दूर करने के लिए 18 मार्च को जीडीए, नगर निगम, जल निगम और बिजली विभाग के अफसरों की बैठक बुलाई गई है। मौके पर जाकर सभी विभागों के अफसर खामियों को चिह्नित करेंगे और फिर उसे दुरुस्त कराएंगे। इसके बाद इन कालोनियों को निगम को हैंडओवर कर दिया जाएगा। बता दें कि जीडीए की 11 ऐसी कालोनियां हैं जो अभी तक निगम को हैंडओवर नहीं हो सकी हैं।    मानचित्र पास कराना सस्ता, 21 गांव को राहत बोर्ड बैठक में मानचित्र से जुड़े दो बड़े मसले भी सुलझा दिए गए। उप विभाजन शुल्क में भारी कमी की गई है। पहले मानचित्र स्वीकृत कराते समय उप विभाजन शुल्क के तौर पर सर्किल रेट का ढाई से 10 फीसदी रकम लगती थी पर अब आवासीय मामले में उप विभाजन शुल्क के तौर पर सर्किल रेट की सिर्फ एक फीसदी रकम देनी होगी। इसी तरह व्यावसायिक निर्माण के लिए दो फीसदी और कार्यालय आदि के निर्माण में 1.5 फीसदी और सुविधाओं के लिए .40 फीसदी ही रकम देनी पड़ेगी। यानी अब अगर 100 वर्ग मीटर में निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने पर पहले की तुलना में करीब एक लाख रुपये की बचत हो जाएगी।

इसी तरह महायोजना 2011 के समय बरगदवा आदि इलाके के 21 ऐसे गांव थे जहां की जमीन का भू-प्रयोग तो बदल गया था मगर निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृति को शासन से मार्गदर्शन लेने का निर्णय किया गया था। इस मामले में प्राधिकरण की तरफ से अभी तक कोई ठोस पहल ही नहीं की गई जिससे हजारों की संख्या में मानचित्र लटके पड़े हैं। बोर्ड बैठक में इस मामले को लेकर भी रजामंदी बनी कि शासन से इस संबंध में मार्गदर्शन की प्रक्रिया पूरी कर इन क्षेत्राें के मानचित्र स्वीकृत किए जाएंगे। 

500 भवनों के लिए 41 करोड़ का बजट
बोर्ड बैठक के दौरान आय और व्यय क ा नया लक्ष्य भी तय किया गया। इसमें एलआईजी और ईडब्लूएस के करीब 500 भवनों के लिए 41 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसी तरह समाजवादी आवास के लिए नए वित्तीय वर्ष में 85 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।  2015-16 में स्वीकृत आय के लक्ष्य 247.75 करोड़ के सापेक्ष फरवरी 2016 तक 295 करोड़ की प्राप्ति हो गई। लक्ष्य प्राप्ति का बजट रिवाइज कर जहां 340 करोड़ रुपये कर दिया गया वहीं 2016-17 के लिए 310 करोड़ की आय और व्यय का लक्ष्य 305 करोड़ तय किया गया है। 
विज्ञापन


जीडीए में अब ई-टेंडर
गोरखपुर। टेंडर में होने वाली गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए जीडीए बोर्ड ने अब प्राधिकरण के 25 लाख से अधिक के कार्यों के ई-टेंडर करने का निर्णय किया है। यह नई व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो जाएगी। इसी तरह प्राधिकरण के सभी विभागों को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। इसके लिए 50 लाख का बजट स्वीकृत किया गया है। 

बोर्ड के अन्य महत्वपूर्ण फैसले
- काश्तकारों से आपसी सहमति के आधार पर बढ़ाया जाएगा लैंड बैंक
- नगर निगम से सीमा विस्तार की अपील
- पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर एक कालोनी में आरओ प्लांट
- 3 से पांच रुपये में 20 लीटर पानी होगा मुहैया
- योजना सफल रही तो सभी कालोनियों में लगेगा आरओ प्लांट
- कार्पोरेट चैंबर योजना में आईबी, यूपी सतर्कता अधिष्ठान और बाट-माप विभाग को दी जाएगी जमीन
- 5000 वर्ग फीट से अधिक की जमीन का 25 फीसदी सोलर पावर सिस्टम के लिए सुरक्षित होगा
- जीडीए के अधिवक्ताओं की फीस बढ़ाई गई
विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें