खखाइचखोर में परछावन के दौरान दीवार गिरने के बाद महिलाओं और बच्चों के चीत्कार से लोगों का दिल दहल उठा। बारात की तैयारियों में जुटे लोग घायलों को मलबे से बाहर निकाल कर अस्पतालों की ओर लेकर दौड़ पड़े। सजधज कर तैयार मासूम बच्चे जार जार रोए जा रहे थे। किसी की मां तो किसी का पिता जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था।
पेशे से वाहन चालक शब्बीर ने अपने बड़े पुत्र इकराम की शादी बैरियाडीह के रहने वाले रमजान की पुत्री रुबीना से तय की थी। शादी की तिथि शुक्रवार को मुकर्रर की गई। सुबह से ही घर में चहल पहल का माहौल था। इकराम के दो छोटे भाई भी शेरवानी पहन कर तैयार थे। परछावन का कार्यक्रम शुरू हुआ और दूल्हा बना इकराम कार में बैठ गया। पीछे उसके दोस्त व घर की महिलाएं डीजे की धुन पर थिरक रहे थे। इसी बीच डीजे का तार सड़क के किनारे स्थित शब्बीर के पुराने व जर्जर हो चुके घर के लिंटर से निकले छड़ में फंस गया। इससे दीवार और छत का एक हिस्सा अचानक गिरा, जिसमें परछावन में शामिल महिलाएं और बच्चे मलबे में दब गए।
दूसरी ओर बारात जाने की तैयारी कर रहे ग्रामीणों को जैसे ही इसकी सूचना मिली वे घटनास्थल ओर दौड़ पड़े। मलबे में दबे सभी लोगों को बाहर निकाला गया मगर तब तक दो महिलाएं दम तोड़ चुकी थीं। इसके बाद ग्रामीण बारात जाने के लिए प्रबंध किए गए वाहनों में घायलों को लाद कर बड़हलगंज की ओर निकल पड़े। गांव में मातम का माहौल हो गया। वहीं, दुल्हन रुबीना के पिता रमजान को जैसे ही घटना की जानकारी हुई वे शादी की तैयारियां छोड़ कर अस्पताल की ओर निकल पड़े। एक साथ चार मौतों के बाद शादी टाल दी गई है।