एड्स को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। जेल में कैदियों के एड्स की जांच और इनके इलाज की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। उप्र राज्य एड्स सोसाइटी (नाको) के तहत कार्यरत लैब टेक्नीशियन हर महीने के दूसरे शनिवार को जेल में सैंपल लेकर जांच करेंगे।
जांच में पॉजीटिव आने वाले मरीजों का इलाज मेडिकल कॉलेज में होगा। अब तक किए गए जांच में नौ कैदियों में एड्स की पुष्टि हो चुकी है और छह का उपचार चल रहा है। जबकि तीन मरीजों का उपचार शुरू होने से पहले ही रिहा हो गए।
प्रदेश की जेलों में बंद करीब 91 हजार कैदियों की जांच का आदेश हुआ है। शासन ने नाको की एक रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए इसे पूरे प्रदेश की जेलों में कैदियों की जांच कराने का निर्णय लिया। शासन से अनुमति मिलने के बाद नाको ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। जेल में सैंपल की जांच करने के लिए मेडिकल कॉलेज के अलावा जिला अस्पताल के लैब टेक्नीशियनों की मदद ली जा रही है। हर बार की जांच रिपोर्ट ऑनलाइन शासन को भेजना जरूरी है।
मंडलीय कारागार गोरखपुर में करीब 1586 कैदी बंद है, इनमें से 1006 कैदियों की जांच हो चुकी है। एड्स की जांच नियमित रूप से करना है क्योंकि लगभग प्रतिदिन जेल में नए कैदी आते रहते हैं। लैब टेक्नीशियन शनिवार को जांच करने के बाद अगले दौरे की जानकारी जेल अधीक्षक को देनी होगी और उनसे संपर्क कर मरीज का मेडिकल कॉलेज में इलाज कराना सुनिश्चित करेंगे।
तीन एड्स पीड़ित बंदियों के रिहाई की सूचना नाको कर्मचारियों को नहीं मिलने के कारण इनका उपचार नहीं हो सका। रिहा किए गए बंदियों के घर गोपनीय पत्र के जरिए जानकारी भेजकर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।