फर्जी दस्तावेज के आधार पर तीन युवकों ने आंध्रा बैंक से 18.22 लाख रुपये की ठगी कर फरार हो गए। युवकों ने फिल्मी अंदाज में लोन लिया और बैंक के जिम्मेदारों को भनक तक नहीं लगी। तीनों ही शख्स एक दूसरे के गारंटर बनकर ठगी की हैं। शाखा प्रबंधक ने शाहपुर थाने में केस दर्ज कराया है। इसके बाद से पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
आंध्रा बैंक की गीता वाटिका शाखा से राजकुमार नाम के एक शख्स ने खुद को विष्णुपुरम का रहने वाला बताते हुए 31 जुलाई 2014 को बैंक से 5.40 लाख रुपये का कार लोन लिया। गायत्रीनगर के अशोक कुमार ने लोन की गारंटी ली थी। इसके बाद फिर 29 सितंबर 2014 को शास्त्रीपुरम के मोहम्मद शमीम ने 6.82 लाख रुपये का लोन लिया। गारंटी अशोक कुमार ने ली। एक दिसंबर 2014 को इसी तरह जालसाजी से दस्तावेज फिर तैयार किया गया और इस बार शमीम की गारंटी पर अशोक ने छह लाख रुपये लोन स्वीकृत करा लिया। इसके बाद इन लोगों ने कार के पंजीकरण का फर्जी प्रमाण पत्र बैंक में जमा किया।
किस्त जमा न होने पर बैंक के अधिकारियों ने राजकुमार, शमीम और अशोक की तलाश शुरू की तो मालूम हो कि जो नाम पते दर्ज है वहां पर इस नाम का कोई रहता ही नहीं है। शाखा प्रबंधक अमित श्रीवास्तव ने डीआईजी से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद शाहपुर थाने में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने का केस तीनों के खिलाफ दर्ज कर लिया गया है।