आत्मदाह के लिए परिवार के साथ जेल पहुंची मृतक कैदी की पत्नी।
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मंडलीय कारागार में कैदी सूर्यभान की मौत के बाद पनपा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार की सुबह कैदी की पत्नी फूला देवी बच्चों के साथ जेल पर आत्मदाह करने पहुंच गईं। फूला ने पहले ही चेतावनी दे दी थी, इससे वहां भारी फोर्स तैनात थी। फूला के पहुंचते ही महिला थानेदार ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
चिलुआताल के मरीपुर दुबी गांव के सूर्यभान की मौत के बाद ही कारागार में बवाल मचा था। पत्नी का आरोप है कि जेल में पिटाई के कारण ही मौत हुई है और मामले में जेलर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। पत्नी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो मंगलवार को बच्चों के साथ आत्मदाह करेंगी। इसके बाद जेल प्रशासन के साथ पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गया। जेल के सामने बैरिकेडिंग कर दी गई थी।
सीओ कैंट अभय मिश्रा, एसओ शाहपुर रामाज्ञा और महिला एसओ डॉ. शालिनी सिंह फोर्स के साथ पहले से ही मौजूद थीं। करीब 11 बजे फूला बच्चों के साथ जैसे ही पहुंची उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्हें बच्चों के साथ महिला थाने पर रखा गया है। फूला ने आरोप लगाया कि पति को जेल में पीटा जाता था। बैठकी के नाम पर रुपये लिए जाते थे। जब वे पति से मिलने जाती थीं तब वे पिटाई की शिकायत की बात बताते थे। कहा है कि जब तक जेलर पर मुकदमा दर्ज नहीं होता वह लड़ाई जारी रखेंगी।
सिर्फ चार बंदियों की होगी विशेष सुरक्षा में पेशी
मंडलीय कारागार में बंद चार बंदियों की ही विशेष सुरक्षा में पेशी कराई जाएगी। पहले 58 बंदियों की सूची थी। मगर इन पर आ रहे खर्च और खतरे की समीक्षा के बाद सूची में सिर्फ चार बंदियों को ही शामिल किया गया है। इसके अलावा किसी अन्य बंदी को विशेष सुरक्षा देने के लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेनी पड़ेगी। विशेष सुरक्षा वाले बंदी को एक दरोगा और तीन सिपाही एक साथ एक विशेष वाहन में लेकर जाते हैं। अन्य 54 बंदी अब सामान्य बंदी सामान्य बंदियों की तरह ही जाएंगे।
मनोज, प्रदीप जैसे अपराधी भी सूची से बाहर
जेल में बंद प्रदीप सिंह, शैलेंद्र यादव, गामा यादव, सुरेंद्र यादव नंदन सिंह जैसे तमाम बड़े अपराधी भी इस सूची से बाहर कर दिए गए हैं। संजय यादव, मनोज ओझा से भी विशेष सुरक्षा हटाई गई है। ये दोनों ही पूर्व में जेल से फरार हो चुके हैं और इन्हें पकड़ने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।