डिस्चार्ज होने के बाद भी 20 दिन तक मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में फरेंदा प्रमुख के रुकने की जांच शुरू हो गई है। महराजगंज जेल अधीक्षक के कारण पूछने के बाद मेडिकल कॉलेज के एसआईसी ने इलाज से संबंधित सारे रिकार्ड कब्जे में लेने के साथ ही डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा है।
महराजगंज जेल बंद फरेंदा के ब्लॉक प्रमुख राम प्रकाश सिंह 12 मई को मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए थे। मेडिसिन विभाग में कुछ दिन इलाज करने के बाद उन्हें आर्थो में भेज दिया गया था। इसके बाद आर्थो के डॉक्टर ने उन्हें मेडिसिन विभाग भेज दिया। 16 मई को डिस्चार्ज होने के बाद भी रामप्रकाश दोनों विभाग के बीच में फंसी फाइल के कारण 20 दिन तक मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में भर्ती रहे। एसएसपी अनंत देव के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती बंदियों की जांच कराने के बाद मामला सामने आने पर आनन-फानन में सात जून को ब्लॉक प्रमुख को डिस्चार्ज कर दिया गया।
खुद को बचाने के लिए डॉक्टरों ने बैक डेट में एंट्री कर ली लेकिन महराजगंज जेल के अधीक्षक ने मेडिकल कॉलेज के एसआईसी को पत्र लिखकर डिस्चार्ज होने के बाद भी 16 मई से सात जून तक राम प्रकाश को मेडिकल कॉलेज में रोकने का कारण पूछ लिया। जेल अधीक्षक का पत्र मिलने के बाद हड़कंप मच गया। एसआईसी ने डॉक्टर एके श्रीवास्तव ने इलाज से संबंधित पूरी फाइल जब्त कर ली है।