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वोटिंग में बवाल, पुलिस पर फेंके पत्थर, लाठीचार्ज

Wed, 21 Sep 2016 07:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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चुनाव के दौरान लाठीचार्ज करती पुलिस। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
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बुधवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव वोटिंग के दौरान बवाल हो गया। वोटरों को रिझा रहे एबीवीपी के छात्रों को पुलिस ने हटाने की कोशिश की तो वे भड़क गए। पुलिस की कार्रवाई से नाराज छात्र पत्थर फेंकने लगे। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिससे एक छात्रनेता को चोटें आई। छात्र नेता पुलिस हिरासत में है। हालांकि इसके बाद पुलिस की चौकसी बढ़ गई और चुनाव प्रक्रिया को सामान्य ढंग से पूरा कर लिया गया।
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छात्रसंघ चौराहे पर सुबह से ही अपने-अपने छात्रनेता के पक्ष में मतदाताओं को रिझाने के लिए छात्र जगह-जगह एकत्र होकर नारेबाजी कर रहे थे। पुलिस ने चौकसी बरतते हुए कई जगहों पर बैरीकेटिंग की थी, जिसके अंदर आईकार्ड दिखाने के बाद ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा था। छात्रसंघ चौराहे के पास मौजूद पुलिस आईकार्ड चेक कर रहे थे। यहीं पर एबीवीपी से जुड़े छात्र वोटरों को रिझाने की कोशिश कर रहे थे। तभी कुछ छात्रों के आईकार्ड पर पुलिस ने सवाल खड़े किए तो पास में ही खड़े छात्रों से उनकी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने हटने को कहा, जिससे नाराज छात्र गुस्से में पत्थरबाजी करने लगे। पहले पहर में ही बवाल होता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया और भीड़ को खदेड़ा। वोटर लिस्ट में नाम नदारद, नहीं दे सके वोट वोटर लिस्ट में नाम न होने से करीब 50 विद्यार्थी वोट नहीं दे सके। ये विद्यार्थी वे थे, जो किसी वजह से अगली कक्षा में दाखिला नहीं ले सके थे। इनमें कुछ छात्राएं ऐसी भी शामिल थीं, जिनका रिजल्ट 12 सितंबर के बाद घोषित हुआ था। इससे नाराज छात्राओं ने चीफ प्रॉक्टर प्रो. सतीश पांडेय से शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन उन्होंने लिस्ट न होने पर वोटिंग प्रक्रिया में शामिल होने से साफ मना कर दिया। दुखी छात्राओं ने बताया कि दो दिन पहले ही रिजल्ट घोषित हुआ है, ऐसे में चुनाव तक फीस जमा करना संभव नहीं था। बोलेरो की सूचना से मचा हड़कंप मतदान शुरू होते ही यूनिवर्सिटी और पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव तब फूल गए जब उन्हें यह जानकारी दी गई कि कोई दबंग प्रत्याशी समर्थक अपनी चुनार प्रचार सामग्री के साथ चार पहिया वाहन से परिसर में प्रवेश कर गया है। इंतजाम में सेंध लगती देख पुलिस टीम पूरे परिसर में उस चार पहिया वाहन को तलाशने लगी। आधे घंटे की मशक्कत के बाद जब वह वाहन नहीं मिला तब जाकर उन्होंने चैन की सांस ली।
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उतरवा दिया राजनीतिक दल का उत्तरीय लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक छात्रसंघ चुनाव में न तो कोई प्रत्याशी और न ही समर्थक किसी राजनीतिक दल के बैनर का प्रयोग कर सकता है। बावजूद इसके कुछ समर्थकों ने पार्टी रंग का उत्तरीय गले में डाल रखा था। ऐसे ही एक समर्थक पर जब पुलिस कप्तान की नजर पड़ी तो उन्होंने वह बलपूर्वक उसे उतरवा दिया। कप्तान का रुख देख अन्य समर्थकों ने पार्टी का उत्तरीय तत्काल उतार दिया। छात्रा प्रत्याशी पर खफा हुए छात्रनेता मंत्री पद की महिला प्रत्याशी ऋचा चौधरी पहले से ही इस पद के अन्य प्रत्याशियों की चुनावी गणित बिगाड़ रही थीं। ऐसे में उनके दीक्षा भवन पर खड़े होकर छात्राओं से वोट मांगने की खबर जब अन्य प्रत्याशियों तक पहुंची तो वे नाराज हो गए और समर्थकों संग दीक्षा भवन पहुंचने का प्रयास करने लगे। उनका तर्क था कि यदि उन्हें मतदान स्थल तक नहीं जाने दिया जा रहा है तो ऋचा को भी ऐसा करने से रोका जाए, लेकिन पुलिस उन्हें यह कहकर रोकने लगी कि उन प्रत्याशियों के एजेंट वहां हैं। इसके बावजूद जब छात्रनेताओं का विरोध जारी रहा तो पुलिस ने बल का प्रयोग करते हुए उन्हें वहां से हटा दिया। हालांकि इसे लेकर उनमें आक्रोश देर तक बना रहा। सराहा गया विकलांग वोटरों का उत्साह दशक बाद छात्रसंघ चुनाव को लेकर यूनिवर्सिटी के छात्रों में खासा उत्साह दिखा। इसकी तस्दीक उन विकलांग विद्यार्थियों को देखकर की जा सकती थी, जो तमाम सुरक्षा इंतजाम से मुकाबला कर मतदान स्थल तक पहुंचे और वोट डाला। वोट देने पहुंची एलएलबी की छात्रा शांति ने कहा कि इतने साल बाद छात्रसंघ बहाल हुआ, ऐसे में वह वोट देने का अवसर कैसे छोड़ सकती हैं। इसी तरह की प्रतिक्रिया एमए अंतिम वर्ष के छात्र योगेंद्र यादव और बीए द्वितीय वर्ष के विकलांग छात्र अजय कुमार निषाद ने भी दी। उन्होंने कहा कि यह खुशनसीबी है कि हमें छात्रसंघ में वोट डालने का अवसर मिला। इन तीनों वोटरों के उत्साह को न केवल प्रत्याशियों से बल्कि प्रशासन से भी सराहना मिली।
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