गीडा आवासीय कॉलोनी सेक्टर पांच में डकैतों ने एक प्राइवेट कंपनी के मैनेजर के घर डाका डालकर इलाके में दहशत फैला दी है। महिला को बंधक बनाकर चार की संख्या में पहुंचे डकैत नकदी समेत लाखों के जेवर लूट ले गए। घटना की जानकारी के बाद एसपी ग्रामीण मय फोर्स पहुंच गए। सहजनवां पुलिस ने महिला की तहरीर पर चार अज्ञात बदमाशों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। मगर प्रथमदृष्टया पुलिस मामले को संदिग्ध मान रही है।
पिपरौली प्रतिनिधि के मुताबिक गीडा सेक्टर पांच में अनूप श्रीवास्तव का मकान है। वह एक सीमेंट कंपनी में मैनेजर हैं। मंगलवार दोपहर 12 बजे के करीब वह बच्चों के स्कूल गए हुए थे, उनकी पत्नी प्रतिभा श्रीवास्तव घर में अकेले ही थी। प्रतिभा के मुताबिक, पहले एक शख्स आया और पूजा के लिए दो अगरबत्ती और एक मुठ्ठी चावल मांगा। वह चावल लेने के लिए अंदर गईं और लौटीं तब तक वह शख्स जा चुका था। थोड़ी देर बाद ही चार की संख्या में बाइक सवार पहुंचे और गेट खोलते हुए सीधे प्रतिभा के पास पहुंच गए। वह कुछ समझ पातीं कि असलहा सटाकर बदमाशों ने जेवर और नकदी की मांग की। डरी प्रतिभा ने लुटेरों को घर में रखा जेवर और नकदी दे दिया। बदमाशों के जाने के बाद घबराई प्रतिभा ने पति और पड़ोसियों को इसकी सूचना दी। प्रतिभा के मुताबिक बदमाश पंद्रह हजार नकद और लाखों का जेवर ले गए हैं।
घटना को ठगी मान रही पुलिस
डकैती की सूचना पर पहुंची पुलिस मामले को प्रथम दृष्टया ठगी मान रही है। पुलिस की मानें तो महिला कई तरह के बयान दे चुकी हैं। जांच में घर के बाहर एक कपड़ा मिला है, जिससे लग रहा है कि साधू बनकर आए किसी शख्स की बातों में आकर महिला ने खुद ही जेवर आदि दे दिए हैं और बाद में डकैती की कहानी बना रही हैं। चूंकि महिला के गले में मंगलसूत्र मौजूद है। यदि कोई लुटेरा आएगा तो एक भी सामान नहीं छोड़ेगा। दूसरी बात यह कि कहीं भी कोई जोर-जबरदस्ती नहीं हुई है। पड़ोसियों को भी घटना की जानकारी नहीं हुई।
एक हफ्ते में दूसरी घटना
एक हफ्ते के भीतर गीडा सेक्टर पांच में हुई यह दूसरी घटना है। अभी 10 अगस्त को ही लुटेरों ने स्कूल से लौट रही शिक्षिका लक्ष्मी सिंह के गले से चेन लूट ली थी। यह घटना शिक्षिका के घर के पास ही हुई थी। मामले का पुलिस अभी पर्दाफाश नहीं कर सकी है।
‘महिला कई तरह का बयान दे रही हैं। अभी उनके द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की तह तक जाने के लिए छानबीन की जा रही है।’
- बृजेश यादव, थानाध्यक्ष, सहजनवां