पूर्व प्रधान सुभाष सिंह हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। शुक्रवार को पुलिस ने उनके बेटे को हत्या के मामले में जेल भेज दिया। पर्दाफाश के दस दिन बाद बेटे का नाम सामने आने और उसे आनन-फानन में जेल भेजने की कार्रवाई ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांसगांव प्रतिनिधि के अनुसार 14 मई की रात धुसना गांव के पूर्व प्रधान सुभाष सिंह (55) की सांवर बाग में स्थित ताड़ी की दुकान के पास गोली मारकर हत्या कर दी। मामले में पुलिस ने सुबाष के मौसेरे भाई अरुण सिंह को गिरफ्तार कर पर्दाफाश किया था। अरुण ने घटना में अपने दो अन्य साथियों के होने की जानकारी दी थी जो फरार चल रहे हैं।
शुक्रवार को मामले में नया मोड़ आ गया। सुभाष सिंह की हत्या में उनके बड़े बेटे गौरव सिंह को दोपहर बाद कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस जांच में गौरव के वारदात में शामिल होने की जानकारी मिलने का दावा कर रही है लेकिन हत्यारों के साथ उसकी मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस का दावा है कि रुपये के लेनदेन को लेकर 14 मई की रात सुभाष और उनके बड़े बेटे गौरव के बीच मारपीट हुई थी। डंडे से हमला करके लहूलुहान करने के बाद वह चला गया इसके बाद पहुंचे अरुण सिंह ने साथियों के साथ मिलकर उन्हें गोली मारी थी। एसओ बांसगांव अखिलेश सिंह ने बताया कि कस्बे में स्थित टैक्सी स्टैंड के पास से गौरव को गिरफ्तार किया गया है।
बांसगांव थाने के हिस्ट्रीशीटर थे सुभाष
मरवटिया के रहने वाले सुभाष सिंह बांसगांव थाने के हिस्ट्रीशीटर थे। उनके बहनोई पुलिस अधिकारी हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग इलाहाबाद में है। सुभाष सिंह की हत्या में बेटे का नाम सामने आने के बाद पर्दाफाश पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब अपना दामन बचाने में लगी है।
सवाल जो उठ रहे
पकड़े गए हत्यारोपी अरुण सिंह ने गौरव का नाम क्यों नहीं लिया
बांसगांव के पूर्व थानेदार बृजेश यादव ने भी तीन लोगों का नाम लिया था
घटना के दिन पिता से गौरव की मारपीट होने का पुलिस दावा कर रही है
आनन-फानन में गौरव को जेल क्यों भेजा गया