नेपाल बॉर्डर पर पेट्रोलियम पदार्थों की तस्करी पर मुख्यमंत्री के सख्ती के बाद अब प्रशासन ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद ने शनिवार को इसके लिए ऑयल कंपनियों के अफसरों के साथ बैठक की। इस दौरान इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड के अफसर मौजूद थे, जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अफसरों के मौजूद न होने पर उन्हें भी फैसलाों की सूचना दे दी गई है। इसके अलावा कमिश्नर ने जांच के लिए एलआईयू और प्रशासन की अलग-अलग टीम बना दी है।
करीब एक घंटे तक चली बैठक में कमिश्नर ने ऑयल कंपनियों के अफसरों को मांग और आपूर्ति की मॉनीटरिंग को सख्त करने का निर्देश दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर वाहनों के अलावा कोई किसान गैलन या डिब्बे में डीजल लेने आए तो उसकी जोतबही या खेत के कागजात देखे जाएं। अगर कोई किसान नहीं है तो उसे डीजल या पेट्रोल न दिया जाए। कमिश्नर ने अफसरों को सोनौली समेत बॉर्डर से सटे महराजगंज की पेट्रोलपंप का निरीक्षण कर पेट्रोलपंप मालिकों और कर्मचारियों पर नजर रखने को कहा है। इसी तरह उन्होंने रसोई गैस को लेकर भी सतर्कता बरतने का निर्देश दिया।
बता दें कि बार्डर पर पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की तस्करी को लेकर मुख्यमंत्री ने कमिश्नर को जांच कराने का निर्देश दिया था। सीएम ने 10 दिन में इस मामले की रिपोर्ट भी मांगी है। इसके बाद कमिश्नर ने डीआईजी को पत्र लिखकर एलआईयू से जांच कराने के अलावा आरएफसी और महराजगंज के एडीएम (फाइनेंस) को भी मामले की जांच का निर्देश दिया है।