गोरखपुर। कुछ समय पहले डॉक्टर से रंगदारी मांगने और मेयर को धमकी देने के आरोप में सुर्खियों में आए तिहाड़ जेल में बंद टोनी ओझा का नाम अब खास तरह की चिट्ठी के कारण चर्चा में है। इससे जहां मेडिकल व्यवसाय के लोगों में सनसनी है, वहीं पुलिस चिट्ठी का सच जानने की कोशिश में लगी है।
टोनी की ओर से जारी बताई जा रही यह चिट्ठी कुछ अफसरों के साथ-साथ अखबार के दफ्तरों में भी भेजी गई है। 20 अक्टूबर को दिल्ली के कड़कड़डुमा डाकघर से पोस्ट इस पत्र में इंसेफेलाइटिस से हर साल बड़ी संख्या में बच्चों की मौत पर चिंता जताई गई है, वहीं डॉक्टरों और जनप्रतिनिधियों की इस मामले में भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में लिखा है कि मेयर और सांसद के रुचि न लेने से इंसेफेलाइटिस काबू नहीं हो रहा और 27 साल से गोरखपुर का विकास ठप है।
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का लाभ लेकर डॉक्टर मरीजों के इलाज से ज्यादा वसूली पर ध्यान देते हैं। अस्पताल से निशुल्क मिल सकने वाली दवाएं भी ज्यादा कीमत पर खरीदनी पड़ती हैं। इंसेफेलाइटिस पीड़ितों को राहत और आम मरीजों को सस्ता इलाज मुहैया कराने की खुद की योजना बताते हुए कहा है कि इसके लिए निर्धारित दूरी पर हॉस्पिटल बढ़वाए जाएंगे। इसके लिए ही डॉक्टर, व्यापारी वर्ग से सहयोग मांगा है।
सीओ कैंट अभय मिश्रा का कहना है कि चिट्ठी टोनी की ही है या किसी ने उसका नाम इस्तेमाल किया है। यह जानने के लिए जांच कराई जा रही है। सनसनी न फैले इसके लिए चिकित्सक, व्यापारी वर्ग को सुरक्षा का भरोसा दिया गया है।