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कर्ज में डूबे नितिन ने आग लगाकर दी थी जान

Sat, 15 Apr 2017 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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‌नितिन अपनी पत्नी के साथ (फाइल फोटो)। - फोटो : Amar Ujala
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हरबंस गली के ज्वैलर्स नितिन अग्रवाल ने कर्ज से परेशान होकर खुद पर पेट्रोल डाला और कार में आग लगाकर जान दे दी थी। इसका पर्दाफाश शुक्रवार को आईजी मोहित अग्रवाल ने कर दिया। आईजी के मुताबिक एसटीएफ, पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट की जांच से नितिन की आत्महत्या की पुष्टि हुई है। यह भी पता चला है कि आत्महत्या के समय कार में कोई और नहीं था। नितिन ही कार चलाकर गए और आग लगाकर जान दे दी। यह घटना नौ अप्रैल को हुई थी।
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पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस में आईजी ने बताया कि नितिन अग्रवाल नौ अप्रैल को सुबह करीब 10:30 बजे घर से स्कूटर लेकर निकले थे लेकिन घर से कुछ दूर पर ही पार्क में खड़ी कार के पास जाकर रुक गए। वहां उन्होंने स्कूटर खड़ा किया और कार लेकर निकल गए। सुबह 11:10 बजे नितिन नौसड़ के पास पांडेय पेट्रोल पंप पहुंचे। वहां से प्लास्टिक की बोतल ली, फिर 120 रुपये का पेट्रोल खरीदा। इसकी बिलिंग भी हुई थी। पेट्रोल पंप के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से पता चला कि नितिन ने ही पेट्रोल खरीदा और कार लेकर रवाना हो गए। इसकी पुष्टि पेट्रोल पंप कर्मियों से पूछताछ में भी हुई है।

यह तथ्य निकलकर सामने आया कि कार में दूसरा व्यक्ति नहीं था। ड्राइवर के बगल वाली सीट खाली दिख रही थी। फोरेंसिक एक्सपर्ट ने कार की सीट और कार से जो सैंपल लिए थे, उससे किसी दूसरे व्यक्ति के कार में बैठने की पुष्टि नहीं हुई है। आईजी ने बताया कि पेट्रोल पंप से कार लेकर नितिन सीधे तेनुआ टोल प्लाजा के पास गए। सहजवां फोरलेन के पास कार खड़ी कर उन्होंने खुद पर पेट्रोल डाला और आग लगा ली।
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सूचना पर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। कार से जो पहचान पत्र मिले, उससे ज्वैलर्स नितिन अग्रवाल की पहचान हुई। आईजी ने बताया कि मरने से पहले नितिन की पत्नी उनकी रश्मि से मोबाइल फोन पर कई बार बात हुई थी। नितिन ने उन्हें आत्महत्या करने की धमकी भी दी थी। इससे परेशान होकर ही परिवार पुलिस के पास पहुंचा और ज्वैलर्स का मोबाइल सर्विलांस पर लगाया गया।

आईजी ने बताया कि कार से जब शव बरामद हुआ था, तब नितिन के हाथ-पैर बांधे होने की बात आई थी, पर यह पूरी तरह से गलत है। आग लगने से कार की वायरिंग बाहर आ गई और मृतक के हाथ-पैर से सट गई। इस कारण हाथ-पैर बांधे जाने का भ्रम हुआ।
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