पेट्रोल छिड़कर खुद को कार में जिंदा जलाने वाले हरवंश गली के ज्वैलर्स नितिन अग्रवाल करीब दो करोड़ रुपये के कर्ज में डूबकर टूट गए थे। पुलिस और एसटीएफ की जांच में नितिन के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में सट्टा लगाने और मेटल ट्रेडिंग के काम पर लाखों रुपये गवांने के तथ्य भी सामने आए हैं। पता चला कि कर्ज में डूबे नितिन ने 36 लाख 50 हजार रुपये के नौ चेक काटे थे। सभी चेक बाउंस हुए और नितिन पर पेनाल्टी भी लगी।
एसटीएफ की जांच से पता चला है कि ज्वैलरी की दुकान से होने वाली आमदनी का लेखा-जोखा मृतक नितिन के पिता गोविंद अग्रवाल रखते थे। नितिन को जरूरी बताने पर ही रुपये मिलते थे। नितिन के सट्टा लगाने या फिर मेटल (सोना, चांदी, तांबा और जिंक) ट्रेडिंग की जानकारी परिवार को नहीं थी। बदनामी न हो, इसलिए मृतक ने कर्ज के बोझ तले दबे होने की जानकारी पिता को नहीं दी थी। नितिन अपने पिता की इज्जत भी करते थे। उनकी आर्थिक दशा बेहद खराब हो गई थी, इस कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली। एसटीएफ के मुताबिक कर्ज में डूबने और मेटल ट्रेडिंग की जानकारी पत्नी को थी। वह परेशान भी थीं लेकिन नितिन के दबाव में पूरी जानकारी परिवार को नहीं दे सकीं। यही वजह थी कि पिता नितिन के इन कामों से अंजान थे।
नितिन ने किए थे 27 फोन
घर से निकलने के बाद पेट्रोल पंप और तनुआ टोला प्लाजा तक पहुंचने के बीच नितिन अग्रवाल ने पत्नी सहित जानने वालों को 27 फोन किए थे। ज्यादातर कॉल पैसों के लेनेदेन को लेकर की गई थी। आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया नौ अप्रैल को सुबह 10: 21 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक नितिन ने 14 लोगों को फोन किए थे। एक एसएमएस भी किया। 11 इनकमिंग कॉल आई। एक एसएमएस रिसीव हुआ। नितिन ने पत्नी रश्मि को सुबह 11: 49 बजे फोन किया था, फिर 11:51 और 11: 57 बजे फोन करके लंबी बात की। नितिन ने पत्नी से साफ कहा था कि वह आत्महत्या करने जा रहे हैं।
नहीं मिले संघर्ष के निशान
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ है कि नितिन जिंदा जले थे। शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं। इससे स्पष्ट है कि नितिन को न तो मारकर जलाया गया और न ही जबरदस्ती की गई। यदि जबरदस्ती हुई होती तो नितिन बचने की कोशिश जरूर करते और शरीर पर चोट के निशान भी होते। फोरेंसिक रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि जबरन जलाए जाने या दुर्घटना के कारण आग लगने की कोई आशंका नहीं दिखी।
इस वजह से चुना था आत्महत्या का यह तरीका
एसटीएफ और पुलिस ने नितिन के आत्महत्या के तरीके पर मनोचिकित्सकों और फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ ही विचार विमर्श किया। मनोचिकित्सकों के मुताबिक आत्महत्या करने वाला व्यक्ति मौजूदा परिस्थितियों में सबसे आसान तरीका ढूंढता है। इसके लिए अधिक समय भी नहीं लेता। घर में लोगों के होने के कारण फांसी लगाना संभव नहीं था। फंदा लगाने का तरीका संभवत्र: उन्हें न पता हो। अधिक वजन व लंबाई होने के कारण उपयुक्त स्थान का चयन भी कठिन था। नींद की गोली या सल्फास खाने पर उल्टी होने पर घरवालों द्वारा बचा लिए जाने की संभावना रहती है। ये वस्तुएं बाजार में आसानी से संभव भी नहीं हैं। बंद गाड़ी में पेट्रोल डालकर जलना सहज एवं सरल तो है ही, इसमें मौत भी सुनिश्चित होती है। यही वजह होगी कि उन्होंने आत्महत्या का यह तरीका अख्तियार किया। आग लगने के बाद ऊपरी त्वचा जलने के बाद अंदर की त्वचा में दर्द नहीं होता है। क्योंकि अंदर की त्वचा संवेदनशील नहीं होती। बंद गाड़ी में पेट्रोल के जलने से कार्बन मोनो आक्साइड बनता है जिससे व्यक्ति अतिशीघ्र अचेतावस्था में आ जाता है।
नितिन के बैंक अकाउंट का हाल
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया - 8895 रुपये
एचडीएफसी - 0
एसबीआई - 6700
कोटक महिंद्रा बैक - 93 रुपये
सभी चेक बाउंस, पेनाल्टी भी लगी
नितिन ने 21 मार्च 2017 को एसबीआई का 12 लाख 7 हजार 976 रुपये का, 11 नवंबर 2016 को एसबीआई का 11 लाख 74 हजार 467, 31 का, दिसंबर 2016 को कोटक महिंद्रा का एक लाख 91 हजार का, 30 दिसंबर 2016 को कोटक महिंद्रा का एक लाख 92 हजार का, 29 दिसंबर को कोटक महिंद्रा का एक लाख 95 हजार का, 28 दिसंबर को कोटक महिंद्रा का एक लाख 90 हजार का, 10 मार्च 2017 को कोटक महिंद्रा का दो लाख का, 31 जनवरी को कोटक महिंद्रा का एक लाख रुपये का चेक काटा था लेकिन सभी बाउंस हो गए क्योंकि अकाउंट में रकम नहीं थी। इसके लिए नितिन पर बैंक की तरफ से पेनाल्टी भी लगाई गई थी।