पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य यात्री परिवहन प्रबंधक (सीपीटीएम) मनोज सिंह के साथ ही कई अफसर भी सीबीआई के रडार पर हैं। सरकारी धनराशि के दुरुपयोग के अलावा कई और गंभीर मामलों की पड़ताल में जुटी सीबीआई की टीम के हाथ लगे अहम दस्तावेजों के आधार पर जल्द ही कुछ अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है। सीबीआई के छापे के बाद रेल अफसर सहमे हुए हैं।
दो साल पहले जब यह मामला पकड़ में आया था, उस दौरान विजिलेंस की जांच में ही सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हो गई थी। आरक्षण केंद्र से होने वाली आय से करीब 30 लाख रुपये कैश काउंटर में जमा ही नहीं कराए। यह रकम वाणिज्य विभाग के एक कर्मचारी के जरिये मंगाई गई थी और उसे सादे कागज पर रिसीविंग दी गई। मुख्यालय कैश काउंटर को भेजी गई रकम में भी इसका जिक्र नहीं किया गया था। विजिलेंस ने इस मामले में चार और लोगों को संदिग्ध बताया था, लेकिन बाद सीपीटीएम पर ही कार्रवाई की गई। सीबीआई इस मामले की पड़ताल में जुटी है।
सूद पर भी रकम देने की चर्चा
सीबीआई के छापे के बाद रेलवे में कई तरह की चर्चाएं चलने लगी हैं। सरकारी धन का दुरुपयोग करके लखनऊ के कुछ बड़े व्यापारियों को सूद पर रकम देने की भी चर्चा है। सूत्रों की मानें तो पहले भी अफसरों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। इसी मामले में जल्द ही जांच के लिए कुछ लोगों को सीबीआई तलब कर सकती है।