एमआईएस व आरडी डाक खातों से ठगी का मामला
दो साल पहले एमआईएस और आरडी डाक खातों से हुई करोड़ों की ठगी मामले में गिरफ्तार डाक कर्मचारी केशव प्रसाद गुप्ता को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट की इलाहाबाद पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस सूचना के बाद आरोपी अन्य पांच कर्मचारियों से हड़कंप मच गया है। घबराए सभी कर्मचारियों ने अपने-अपने अधिवक्ताओं से सलाह लेना शुरू कर दिया है।
चार मार्च 2014 की शाम करीब तीन बजे कुछ खाताधारक प्रधान डाकघर पहुंचे और वहां के तत्कालीन सीनियर पोस्टमास्टर से बताया कि उन्होंने दो एजेंट के माध्यम से लाखों की रकम एमआईएस व आरडी के तहत जमा कराई थी और अब जब पैसे की जरूरत है तो वे दोनों न तो फोन उठा रहे हैं और न ही अपने घर पर मिल रहे हैं।
पोस्टमास्टर ने उनके खाते की तस्दीक की तो पता चला कि रकम तो काफी पहले निकाल ली गई है। जालसाजी की जानकारी पर जब उन एजेंटों से जुड़े अन्य खाताधारकों ने अपने खाते में रकम की जांच की तो पता चला कि एजेंट दर्जनों लोगों के करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गए हैं। ठगी करने वाले जिन एजेंटों का नाम सामने आया वे एक ही परिवार चाचा-भतीजा और उनकी पत्नियां थीं।
चार दिन बाद पीड़ित खाताधारकों की तहरीर पर कैंट थाने में एजेंट महेंद्र पाठक व उसकी पत्नी माधुरी पाठक और उसके भतीजे शिवराज पाठक व उसकी पत्नी रंजना पाठक समेत उससे जुड़े सभी डाक कर्मचारियों और अधिकारियों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में डाक विभाग की विजिलेंस जांच में छह कर्मचारियों पर गबन का आरोप तय हुआ और फिर डाक विभाग की तहरीर पर उन सात कर्मचारियों पर नामजद मुकदमा दर्ज हुआ। उनमें से एक केशव प्रसाद गुप्ता को 11 जनवरी को खाताधारकों की सूचना पर पुलिस ने प्रधान डाकघर के पास से गिरफ्तार कर लिया था।
जमानत को लेकर केशव गुप्ता को पहला झटका सेशन कोर्ट से मिला और हाईकोर्ट ने भी उन पर लगे आरोप को गंभीर बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया है। केशव गुप्ता को डाक विभाग ने 31 लाख 34 हजार के गबन का दोषी माना है।
ये आरोपी कर्मचारी हैं फरार
घनश्याम सिंह (सहायक पोस्ट मास्टर)
हितेंद्र यादव (डाक सहायक)
प्रियंका सिंह (डाक सहायक)
योगेश पाल (डाक सहायक)
योगेश पटेल (डाक सहायक)