मेडिकल कॉलेज में भर्ती अर्जुन का अपहरण उसके फूफा ने कर लिया था।
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बच्चे का अपहरण करने वाला रिश्तेदार खलीलाबाद स्टेशन पर उसे छोड़कर भाग निकला। जीआरपी ने बच्चे को अनाथ आश्रम में पहुंचा था। मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन में जुटी राजघाट पुलिस ने अखबार में प्रकाशित समाचार को पढ़ने के बाद बच्चे को बरामद कर लिया।
बस्ती के रहने वाले पंकज चौहान की शादी छह साल पहले अलहदादपुर के रहने वाले राकेश चौहान की बहन से हुई थी। आपसी विवाद की वजह से आठ महीने से पंकज की पत्नी मायके में रहती है। 29 फरवरी को पंकज पत्नी की विदाई कराने अलहदादपुर आया था। पत्नी जाने को तैयार नहीं हुई तो राकेश के आठ महीने के बेटे अर्जुन को लेकर फरार हो गया था।
राकेश ने बहनोई पंकज पर राजघाट थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया था। बच्चे की तलाश में जुटी पुलिस पंकज के रिश्तेदारों के यहां दबिश दे रही थी। दबाव बढ़ने पर वह चार मार्च को खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर अर्जुन को छोड़कर फरार हो गया। जीआरपी के सिपाहियों ने बच्चे को मजिस्ट्रेट की अनुमति से गगहा में स्थित सरस्वती बाल गृह भेज दिया। दो दिन पहले उसकी तबीयत बिगड़ने पर बाल गृह के प्रबंधक ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया।
राजघाट पुलिस अखबारों में खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर लावारिस बच्चा मिलने की खबर पढ़कर वहां पहुंची। जानकारी लेकर एसओ मिथिलेश राय बृहस्पतिवार की सुबह सरस्वती बाल गृह पहुंचे। जहां पर अर्जुन के मेडिकल कॉलेज में होने की जानकारी मिली। दोपहर एक बजे राकेश और उनकी पत्नी को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो उन्होंने बच्चे की पहचान कर ली।
एसओ ने बताया कि खलीलाबाद में मजिस्ट्रेट के सामने प्रार्थना पत्र दिया जाएगा। मजिस्ट्रेट के निर्देश पर बच्चे को उसके घरवाले ले जा सकेंगे।