दो साल से गैर हाजिर चल रहे सिपाही को वेतन मिलने के मामले में एसएसपी ने पांच पुलिसकर्मियों पर जालसाजी का केस दर्ज कराया है। आरोपियों में तत्कालीन आरआई, गणना मुंशी, पुलिस ऑफिस के दो बाबू और गैर हाजिर चल रहा सिपाही शामिल है। इस कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है।
पुलिस लाइंस में तैनात 2001 बैच का सिपाही महेंद्र प्रताप दो साल से गैर हाजिर चल रहा था। पुलिस लाइंस में आमद न होने पर उसने एसएसपी से आरआई की शिकायत की, जिसके बाद एसएसपी ने सीओ लाइन रोहित सिंह सजवान को मामले की जांच के आदेश दिए। छानबीन में पता चला कि गैर हाजिर होने के बाद भी महेेंद्र दो साल से वेतन ले रहा था। इसके लिए तत्कालीन आरआई अनिल पांडेय, गणना मुंशी राजकुमार यादव, पुलिस आफिस में तैनात एएसआई (एम) राजेश कुमार सिंह, राकेश दुबे को जिम्मेदार ठहराया गया।
8 दिसंबर को सीओ लाइन ने जांच रिपोर्ट एसएसपी को दे दी। शनिवार को एसएसपी लव कुमार के निर्देश पर एसओ कैंट श्यामलाल यादव ने सभी आरोपियों पर साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने और सरकारी रुपये का गबन करने का केस दर्ज किया। आर्मोरर से विवाद होने के बाद तत्कालीन आरआई अनिल पांडेय का तबादला मिर्जापुर के चुनार स्थित आरटीसी हो गया था, जबकि तत्कालीन गणना मुंशी राजकुमार यादव डीआईजी आफिस में कार्यरत है। एसएसपी लव कुमार ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।