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महिला आईपीएस पर पथराव में एफआईआर

Tue, 09 May 2017 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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रविवार को प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया था। - फोटो : Amar Ujala / File photo
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चिलुआताल के नकहा नंबर दो कोईलहवा में सरकारी शराब की दुकानें बंद कराने को लेकर सड़क जाम करके गत रविवार को महिला आईपीएस अफसर एएसपी गोरखनाथ चारु निगम पर पथराव और पुलिस पर हमले के मामले में एफआईआर दर्ज हो गई। इस मामले में छह महिलाओं को नामजद किया गया। 50 अज्ञात लोगों पर सरकारी कामकाज में बाधा फैलाने का मामला भी दर्ज हुआ। एफआईआर में भाजपा विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का नाम नहीं है। हालांकि पुलिस ने विधायक को जांच के दायरे में रखा है। एफआईआर चौकी इंचार्ज वीरेंद्र कुमार यादव की तहरीर पर हुई है। 
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चिलुआताल के नकहा नंबर दो कोईलहवा के ग्रामीणों ने गांव में सरकारी शराब की दुकान खोलने का विरोध किया। इसे लेकर रविवार को पांच घंटे तक सड़क भी जाम रखा। सूचना पाकर मौके पर पहुंची एएसपी चारु निगम ने लाठी-डंडों से लैस महिलाओं को समझाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। मामूली कहासुनी के बाद ग्रामीण उग्र हो गए और सबने पुलिस पर हमला कर दिया। इस मामले में भाजपा के नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का नाम भी आया। आरोप लगा कि विधायक ने महिला आईपीएस को डपट लिया, इस कारण वह फफक कर रो पड़ीं।

मामला उछला तो पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई का मन बना लिया। एसपी सिटी गणेश साहा और एएसपी चारु निगम रविवार की रात करीब दो बजे चिलुआताल थाने पहुंची। एक सिपाही की तहरीर पर एफआईआर भी हो गई। पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन, सरकारी काम में बाधा, मारपीट, जाम लगाकर आसपास के लोगों में भय फैलाने, 7 सीएलए की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। एफआईआर होने के बाद ग्रामीण दहशतजदा हैं। ज्यादातर ग्रामीण घर छोड़कर भाग गए हैं। सबको गिरफ्तारी का डर सता रहा है। दूसरी तरफ पुलिस ने आरोपियों की तलाश में दबिश देना शुरू कर दिया है। 
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विवेचना में आ सकता है विधायक का नाम
पुलिस सूत्रों की माने तो पुलिस पर हमला करने वालों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया जाएगा। विवेचना में विधायक का नाम भी डाला जा सकता है। विधायक ने ग्रामीणों को भड़काने का काम किया है। विवेचना में नाम आया तो विधायक पर सरकारी कामकाज में बाधा डालने और भीड़ को उकसाने का मामला दर्ज किया जा सकता है। 
 
इन्हें नामजद किया गया
चौकी इंचार्ज की तहरीर पर कोइलहवा निवासी राजमती, फुलिया देवी, सोमारी देवी, रीना देवी, आशा देवी, विद्यावती समेत 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। 

सभी केंद्रों के ध्यानार्थ
महिला आईपीएस पर हमले से संबंधित खबर जिला पुलिस की सुस्ती पर बिफरे आईजी शराब की दुकान हटाने को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान महिला आईपीएस चारु निगम और भाजपा विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के बीच हुई झड़प को आईजी ने गंभीरता से लिया है। जिला पुलिस की सुस्ती पर सवाल खड़े करते हुए आईजी मोहित अग्रवाल ने जवाब मांगा है। आईजी ने आला अफसरों को समय से सूचना न देने पर नाराजगी जताई है। उधर, एएसपी इस पूरे मामले पर अब कुछ भी बोलने से बच रही हैं।  

आईजी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आईजी ने फैक्स के जरिए एसएसपी से स्पष्टीकरण मांगते हुए घटना की सूचना समय से न देने पर नाराजगी जताई है। पत्र में साफ कहा गया है कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी समय से अफसरों को सूचित न करना कहीं से भी सही नहीं है। देर शाम आला अफसरों को घटना की जानकारी मीडिया और अन्य लोगों से हुई। पुलिस ने कार्रवाई करने में भी सुस्ती बरती। विस्तृत रिपोर्ट के साथ ही आईजी के जवाब मांगने के बाद से हड़कंप मच गया है। हालांकि अभी जिला पुलिस ने कोई भी जवाब नहीं दिया है। 

इन बिंदुओं पर मांगा स्पष्टीकरण
- समय से घटना की जानकारी क्यों नहीं दी गई
- जाम लगाने वालों के खिलाफ केस तुरंत दर्ज क्यों नहीं किया गया
- जाम लगाने वालों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई सोशल मीडिया पर छलका महिला अफसर का दर्द आईपीएस चारु निगम और नगर विधायक के बीच झड़प का मामला सोशल मीडिया पर भी छा गया है। खुद चारु निगम ने अपने फेसबुक एकाउंट पर अपना दर्द पोस्ट किया है। पोस्ट में उन्होंने लिखा है, ‘मेरे आंसुओं को मेरी कमजोरी न समझना, कठोरता से नहीं कोमलता से अश्क छलक गए। महिला अधिकारी हूं, तुम्हारा गुरुर न देख पाएगा, सच्चाई में है जोर इतना अपना रंग दिखलाएगा।’ इस पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट भी आने लगे हैं। ज्यादातर लोगों ने अफसर के रुख को सही ठहराया है। महिला आईपीएस अफसर ने गत रविवार को हुए विवाद का सिलसिलेवार जिक्र भी फेसबुक पर किया है। साथ ही सहयोग के लिए गोरखपुर की मीडिया को बधाई दी। फेसबुक एकाउंट पर भाजपा विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का नाम नहीं है लेकिन महिला अधिकारी और गुरुर से संबंधित पोस्ट को किसी के दबाव में न आने से जोड़कर देखा जा रहा है। 

एक महीने पहले अफसरों ने किया था जागरूक
गोरखपुर। जिस चिलुआताल इलाके में शराब को लेकर इतना बड़ा बवाल हो गया, वहीं पर ठीक एक महीने पहले सीओ गोरखनाथ चारु निगम, एसडीएम और आबकारी अफसरों ने जागरूकता अभियान चलाया था। तीन थाने की फोर्स के साथ घूम-घूमकर पुलिस ने कहा था कि यदि कहीं भी शराब को लेकर आपत्ति है तो संबंधित विभाग या थाने को सूचित करें, कानून को हाथ में न लें। इसके बाद कुछ शिकायतें भी आईं, मगर इसमें उस गांव की शिकायत नहीं थी। हालांकि विधायक का कहना है कि 15 दिन पहले एसडीएम ने दुकान बंद कराई थी, मगर पुलिस के सहयोग से इसे फिर खोल दिया गया।
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