पकड़ा गया इनामी धनंजय तिवारी एक जनप्रतिनिधि के साथ ही सपा नेता की हत्या के फिराक में था। पूछताछ में उसने कई वारदातों को साथियों के साथ मिलकर अंजाम देने की बात स्वीकार की है। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस फरार चल रहे प्रिंस चंद की तलाश में जुटी है।
शनिवार की दोपहर शाहपुर थाने में एसपी (सिटी) हेमराज मीना ने प्रेसवार्ता में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 20 मई 2014 को पिपरौली के पूर्व ज्येष्ठ ब्लाक प्रमुख लाल बहादुर यादव की यूनिवर्सिटी के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विवेचना के दौरान बेलीपार, भौवापार के धनंजय तिवारी समेत 14 लोग का नाम हत्या और साजिश में सामने आया था। 12 बदमाश जेल चले गए थे, लेकिन धनंजय और गगहा का रहने वाला उसका साथी प्रिंस चंद फरार चल रहे थे।
तीन मई को एसओ शाहपुर रामाज्ञा सिंह ने मुखबिर की सूचना पर रेल विहार कॉलोनी के पास 12 हजार रुपये के इनामी बदमाश धनंजय तिवारी को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक तमंचा और चार जिंदा कारतूस भी मिले। लाल बहादुर हत्याकांड के अलावा कैंट पुलिस पर 2014 में हमला कर फरार होने और गैंगेस्टर के मुकदमे में वह वांछित था। हत्या की योजना बनाने के बाद उसने सोनू की मदद से 30 हजार रुपये में कारबाइन बिहार से खरीदी थी।
धनंजय पर दर्ज हैं 14 मुकदमे
साल 2002 में धनंजय पर पहला मुकदमा मारपीट का दर्ज हुआ था। इसके बाद 2003 में नौसढ़ चौराहे पर सिपाही से मारपीट के दौरान गोली चलने से सिपाही घायल हो गया था। इसके अलावा हत्या का प्रयास, लूट और आर्म्स एक्ट के कुल 14 मुकदमे उसपर पर दर्ज हैं। फरारी के दौरान वह सीवान में रहने वाले सोनू सिंह के पास रहता था। सोनू मऊ के रहने वाले बदमाश रमेश उर्फ काका का करीबी है। पूछताछ में उसने कारबाइन सोनू के पास होने की जानकारी दी।