रंजना और सारदेश की शादी के सात साल बाद श्रेयांस का जन्म हुआ था, वह भी बड़ी मन्नतों के बाद। वह पूरे घर का दुलारा था। ननिहाल में भी सभी की आंखों का तारा था, मगर मामा के बहूभोज में शराब की मस्ती में चली एक गोली ने उसे हमेशा के लिए उस परिवार से दूर कर दिया जिसके लिए उन्होंने जाने कितने सपने देखे थे। कैंट इलाके के गिरधरगंज में रविवार की रात श्रीओम सिंह के बहूभोज कार्यक्रम में हुई इस हृदयविदारक घटना ने माता-पिता को तो बेसुध कर ही दिया, ननिहाल में भी बहू आने की खुशी काफूर हो गई। चारों तरफ मातम और चीख-पुकार ही रह गई।
रंजना और सारदेश की शादी फरवरी 1999 में हुई थी। सारदेश भी मां-पिता के अकेले हैं। दोनों को करीब सात साल बाद एक दिसंबर 2006 में पुत्र की प्राप्ति हुई। काफी मन्नतों के बाद पैदा हुए इस बच्चे का नाम श्रेयांस रखा गया। ट्रेजरी में काम करने वाले सारदेश सिंह का ही नहीं श्रेयांस पूरे परिवार का दुलारा था। शहर के महंगे कान्वेंट स्कूल में उसकी शिक्षा चल रही थी। कुल का अकेला चिराग होने से हर कोई अपने स्तर से उसकी देखभाल करता था। पढ़ने-लिखने में होशियार श्रेयांश अपने मामा की शादी को लेकर बहुत खुश था। उसने जिद कर अपने लिए अच्छे कपड़े खरीदवाए थे। अब जबकि वो इस दुनिया में नहीं है, घर वाले उसकी एक-एक बात याद कर सिसक रहे हैं। यहां तक कि सांत्वना देने वालों का भी गला भर आ रहा है।
एक दिसंबर को था जन्मदिन
अभी ग्यारह दिन पहले ही श्रेयांश और उसके घरवाले खुशियों में डूबे थे क्योंकि एक दिसंबर को उसका जन्मदिन था। इस दिन घर में पार्टी का भी आयोजन किया गया था। इसमें श्रेयांस के दोस्त और रिश्तेदार भी शामिल हुए थे।
सिंगर बनाना चाहता था श्रेयांश
श्रेयांश को गाने का शौक था। वह गायन में अपना भविष्य बनाना चाहता था। घरवाले भी उसकी इस इच्छा का सम्मान करते और उसे प्रोत्साहित करते थे। इसके अलावा उसे फोटोग्राफी का भी शौक था। वह उस समय मामा-मामी की शादी का वीडियो ही बना रहा था, जब उसके सिर में गोली लगी।