बांसगांव के धुसना गांव के पूर्व प्रधान सुभाष सिंह की हत्या उनके मौसेरे भाई अरुण सिंह ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर की थी। इनमें से एक का रुपये को लेकर पूर्व प्रधान से विवाद भी चल रहा था। तीनों ने एक ही तमंचे से बारी-बारी तीन गोली मारी थी। अरुण तो इसलिए खार खाए था क्योंकि उसकी भाई के हत्याकांड में गवाही देने से सुभाष ने इन्कार कर दिया था।
पुलिस लाइंस में शुक्रवार की दोपहर प्रेस वार्ता में एसपी क्राइम ओपी सिंह ने बताया कि बांसगांव कस्बे के वार्ड नंबर सात, मरवटिया उत्तरी निवासी सुभाष सिंह (56) धुसुना गांव के पूर्व प्रधान थे। उन्होंने क्षेत्र में ताड़ी बिक्री का ठेका लिया था। कस्बे से सटे सांवर गांव के बाग में स्थित झोपड़ी में वह दुकान चलाते थे।
13 मई की रात दुकान के बाहर तख्ते पर उनकी हत्या कर दी गई। मौके पर पुलिस को वार्ड नंबर दस में रहने वाले सुभाष के मौसेरे भाई अरुण सिंह की बाइक मिली थी। परिवार के लोगों ने अरुण पर ही हत्या का संदेह जताया था। एसओ बृजेश यादव ने शुक्रवार की सुबह गोगहरा पुल के पास उसे गिरफ्तार किया। उसके पास से घटना में इस्तेमाल हुआ तमंचा भी मिला।
पूछताछ में अरुण ने बताया कि 1992 में उसके भाई जितेंद्र सिंह की कस्बे में रहने वाले श्यामसुंदर सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में सुभाष सिंह गवाह थे। मुकदमा ट्रायल पर आने के बाद सुबाष गवाही से मुकर गए। इसके बाद से ही उसने उनकी हत्या करने की ठान ली थी।
अरुण ने बताया कि घटना में उसके साथ अजय सिंह और झिल्लू भी थे। अजय से सुभाष सिंह ने 35 हजार रुपये लिए थे। इसे लेकर दोनों के बीच कई बार विवाद हुआ था। एक ही तमंचे से तीनों ने बारी-बारी से तीन गोली सुभाष की कनपटी, चेहरा और जबड़े में मारी थी। एसपी क्राइम ने बताया कि फरार दो अन्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बांसगांव थाने का हिस्ट्रीशीटर है अरुण
अरुण सिंह बांसगांव थाने का हिस्ट्रीशीटर है। सुभाष सिंह की हत्या से पहले उस पर हत्या के दो सहित एक दर्जन मुकदमे दर्ज थे। दस मुकदमा तो बांसगांव थाने में ही दर्ज है। अरुण ने बताया कि वह टेंपो चलवाता है। उसके चार भाइयों में दो प्रमोद सिंह और जितेंद्र बहादुर सिंह की हत्या हो चुकी है।