झरना टोला मर्डर केस का पर्दाफाश करते एसएसपी साथ में एसपी सिटी। बीच में खड़ा आरोपी (गमछा लपेटे हुए)।
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सीआरपीएफ हवलदार जवाहर लाल ने झरना टोला हत्याकांड के पर्दाफाश पर सवाल उठाते हुए हत्यारोपी अरुण के साथियों को बचाने का पुलिस पर आरोप लगाया है। उन्होंने घटनास्थल की स्थिति और अरुण के दावे को भी झूठा बताया है।
पुलिस लाइंस में एसएसपी के प्रेस वार्ता में मौजूद जवाहर लाल ने टेंपो चालक अरुण दीक्षित की बातें सुनने के बाद सवाल उठाने शुरू कर दिए। जवाहर और उनके साले रामू का तर्क था कि अकेले अरुण महिला और तीन बच्चों का कत्ल नहीं कर सकता। यही नहीं, रजिया और दो बच्चों की हत्या के बाद घर में ही चार घंटे तक बैठकर छत पर सो रही बेटी पूनम के नीचे आने का इंतजार करने की बात भी पूरी तरह गलत है।
उनका कहना था कि अरुण के साथ घटना के समय जेल का एक बंदीरक्षक और उसे संरक्षण देने वाले साथी भी थे। गलत बयान देकर वह साथियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। पुलिस भी उसकी बातों पर विश्वास कर रही है।
जवाहर लाल ने जो सवाल उठाए
खिड़की, सीढ़ी के रोशनदान पर पर्दे किसने लगाए?
अरुण ने पूछताछ में घर में पर्दा न लगाने की बात बताई है?
बेटे का कत्ल बिस्तर पर हुआ है, जबकि अरुण दौड़ाकर मारने की बात कह रहा है?
पत्नी की लाश कमरे में बिस्तर पर पड़ी थी। विवाद होने के बाद दोनों एक साथ कमरे में कैसे रहे?
रजिया और दो बच्चों का कत्ल करने के बाद चार घंटे तक बड़ी बेटी के नीचे आने का इंतजार क्यों किया?
घटना से साथी अनजान थे तो मास्क लगाकर एटीएम से रुपये क्यों निकाले?
अरुण ने किया फरार होने का दावा
हत्यारोपी अरुण दीक्षित ने पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारियों से खुद के फरार होने का दावा किया। कहा, उसे मालूम है कि जेल जाने के बाद उसे जमानत नहीं मिलेगी। पुलिस चाहे कितनी भी घेराबंदी कर ले, वह जेल से फरार हो जाएगा।