कार्यभार संभालने के बाद एडीजी ने लोगों की समस्याएं भी सुनीं।
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एडीजी दावा शेरपा ने अपराधियों पर सख्ती का संकेत देकर दो टूक कहा कि अपराध को पेशा बनाकर धन अर्जित करने वालों की अब खैर नहीं है। पेशेवर अपराधी अगर जरायम से अलग नहीं होते हैं तो उन्हें घर में घुसकर मारेंगे। उन्होेंने कहा कि जमीनी विवाद के छोटे मामले ही बड़े अपराध की वजह बनने लगे हैं, पुलिस इससे पूरी तत्परता से निपटेगी। भारत-नेपाल बार्डर पर हालात ठीक नहीं हैं, पड़ोसी देश की पुलिस से रिश्ते सुधारेंगे और आतंकी गतिविधियों पर निगरानी तेज की जाएगी।
एडीजी दावा शेरपा सोमवार को कार्यभार संभालने के बाद पत्रकारों से रूबरू थे। उन्होंने प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को बेहतर बनाना ही लक्ष्य है। कम संसाधन में भी जज्बे से पुलिस इसे करके दिखाएगी। युवाओं के अपराध की ओर ओर बढ़ते कदमों को रोकने के सवाल पर कहा कि रौब जमाने और जल्दी धन कमाने के लिए युवा इस तरफ कदम बढ़ाते हैं। पुलिस को युवाओं को सही समय पर यह बताने की जरूरत है कि अपराध फायदेमंद नहीं बल्कि नुकसान पहुंचाएगा। समझाने से काम नहीं बना तो उनका मनोबल गिराने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
विश्वास के लिए जनता से संवाद जरूरी
एडीजी ने कहा कि जनता से संवाद कायम करना जरूरी है। इससे उनके मन में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ेगा। कुशीनगर में जंगल पार्टी के खात्मे के लिए शुरू किए ऑपरेशन का हवाला देते हुए बताया कि उस दौरान मैं एसपी के पद पर तैनात था। जंगल पार्टी वाले इलाके में पीएसी तैनात की गई लेकिन नागरिक सूचनाएं नहीं देते थे, वे डाकुओं से डरते थे। स्कूलों में शिक्षक पढ़ाने नहीं जाते थे। मैंने सिपाहियों को मास्टर बनाकर प्राथमिक स्कूलों पर भेजा। बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और पुलिस और जनता के बीच संवाद स्थापित कराया। विश्वास बना तो जंगल पार्टी की सूचनाएं आने लगी। अपराध खात्मे के लिए जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर हर प्लेटफॉर्म पर सूचनाएं एकत्र करने के लिहाज से सतर्क रहता हूं।