डॉ. आरती (लाल ड्रेस में) दोस्तों के साथ।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज की सीनियर रेजिडेंट डॉ. आरती झा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। डॉ. आरती को बेहोशी की हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सीनियर रेजिडेंट बिहार के दरभंगा जिले की रहने वाली थीं। सूचना पर माता-पिता और भाई गोरखपुर पहुंच गए। भाई प्रशांत झा ने डॉ. आरती की हत्या की आशंका जताई है। साथ ही गुलरिहा थाने में अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी। उनका आरोप है कि बहन के साथ मारपीट कर गला दबाकर मारा गया है। सिर, शरीर पर चोट के निशान भी हैं। हालांकि पुलिस इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या मान रही है।
बिहार के दरभंगा जिले के थाना आयाघाट के पौराराम गांव की रहने वाली डॉ. आरती झा गायनी विभाग में पीजी थर्ड ईयर की छात्रा थीं। वह इंदिरा हॉस्टल के कमरा नंबर 35 में रहती थीं। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद डॉ. आरती ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के पीजी कोर्स में एडमिशन लिया। वह केजीएमयू की टॉपर थीं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक शुक्रवार की देररात डॉ. आरती के पेट में दर्द हुआ। इसके बाद उन्होंने हॉस्टल की जूनियर डॉ. कामना को बुलाया और पेट दर्द की बात कहके इंट्राकैथ लगवाया, फिर किसी वक्त बेहोशी के इंजेक्शन की ओवरडोज ले ली।
इसी बीच ड्यूटी से लौटी हॉस्टल की कुछ छात्राओं ने डॉ. आरती का दरवाजा खटखटाया। कुछ देर तक दरवाजा नहीं खुला तो धक्का दिया और अंदर की कुंडी खुल गई। देखा तो आरती अचेत अवस्था में पड़ी थीं। बेहोशी की हालत में ही मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल की इमरजेंसी स्थित ट्रामा सेंटर ले जाया गया। आनन-फानन डॉक्टर उसे आईसीयू ले गए, जहां कुछ देर में उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बीआरडी के प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने इसकी सूचना पुलिस और पिता को दी। पुलिस ने एक डायरी कब्जे में ली है। बताया जा रहा है कि आरती ने यह डायरी पापा के लिए लिखी थी। डायरी में सुसाइड नोट मिलने की बात पुलिस बता रही है। इसी को आधार बनाकर जांच भी कर रही है। वहीं, भाई प्रशांत ने बीआरडी प्रशासन पर मामले को दबाने के साथ ही संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बहन सीनियर रेजिडेंट थी, फिर भी पोस्टमार्टम हाउस पर सीनियर चिकित्सक या फिर सहपाठी नहीं पहुंचे। इससे लग रहा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन कुछ दबाने की कोशिश कर रहा है। मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन कुछ बोलने को तैयार नहीं है।