आप एसबीआई का क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो जरा सजग हो जाइए। वरना तगड़ा चूना लग सकता है। आपके क्रेडिट कार्ड से मोटी रकम आस्ट्रेलिया की मोबाइल कंपनी टेलेस्प्रा के खाते में जा सकती है। शहर के एक वैज्ञानिक समेत देश भर के करीब एक हजार लोगों के साथ ऐसा करते हुए साइबर ठग उन्हें करोड़ों रुपये की चपत लगा चुके हैं।
गोरखपुर में तैनात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (नॉयलेट) के साइंटिस्ट अभिनव मिश्र कुछ इसी तरह ठगों के शिकार बन गए
27 अगस्त को उनके मोबाइल फोन पर संदेश आया। उन्होंने मोबाइल चेक किया तो एक साथ चार मैसेज आए थे। इसमें क्रेडिट कार्ड से रकम कटने की सूचना थी। ये कटौती डॉलर में हुई थी, जो आस्ट्रेलिया की एक मोबाइल कंपनी के खाते में गई थी। आननफानन अभिनव ने एसबीआई के एप से अपना क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कर दिया, लेकिन तब तक उनके खाते से करीब 26,000 रुपये आस्ट्रेलिया की कंपनी के खाते में जा चुके थे। अभिनव ने जब इसकी शिकायत एसबीआई के कॉल सेंटर पर की तो इंटरनेशनल शॉपिंग करने की बात कही गई। अभिनव ने इस तरह की किसी भी खरीदारी से इन्कार किया। फिर उन्होंने एसबीआई के अधिकारियों से मामले की शिकायत की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उल्टे एसबीआई ने उन्हें क्रेडिट कार्ड की इंटरनेशनल पेमेंट सुविधा ब्लॉक कराने का सुझाव दे दिया। बैंक के अफसरों के गोलमोल जवाब से खिन्न अभिनव ने मामले की शिकायत आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) से कर दी। आरबीआई की पहल पर उन्हें रकम वापस मिल गई। इसके साथ ही एसबीआई ने ठगी की जांच के लिए 120 दिन की मोहलत मांगी।
पीड़ितों का बनाया व्हाट्सएप ग्रुप
इधर, ठगी के शिकार हुए अभिनव ने इंटरनेट पर साइबर ठगी से जुड़े मामले तलाशे। उन्हें अपनी तरह के हजार पीड़ित मिले। ये भी एसबीआई क्रेडिट कार्ड यूजर थे और इनकी रकम भी डॉलर में आस्ट्रेलिया की कंपनी के खाते में चली गई थी। ये सभी अपनी रकम वापस पाने की जद्दोजहद में लगे थे। वैज्ञानिक अभिनव मिश्र ने इंटरनेट से कुछ पीड़ितों के नंबर जुटाए। बात की और फिर एक व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया। इस पर अभिनव ने ठगी के खिलाफ अपनी लड़ाई अन्य पीड़ितों से साझा की। साथ ही रकम वापस मिलने पर भी संदेश भेजा। अब कई पीड़ित उनकी राह पर आगे बढ़े हैं।
न कंफर्मेशन कॉल और न ओटीपी
खास बात यह कि इंटरनेशनल पेमेंट के वक्त न तो इन ग्राहकों के पास कोई कंफर्मेशन कॉल आई और न ही कोई ओटीपी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा गया। सीधे रकम कटने की जानकारी ही इनके फोन के इनबॉक्स में पहुंची। बैंक ने बताया कि कार्ड से इंटरनेशनल पेमेंट पर ओटीपी की जरूरत नहीं होती। इंटरनेट पर इस तरह की शिकायत वरुण त्रिखा, श्रेयांशु मिश्र, अरुल कुमार, चंदर वेंकटरमन, रिंकू, कुंदन, निव्रूति, गोपीचंद जैसे कई लोगों की शिकायतें दर्ज हैं। इन सबने बिना कंफर्मेशन कॉल और ओटीपी के हुई धोखाधड़ी की सूचना दी है। कई आस्ट्रेलियाई कंपनी के सताए हैं तो कई कुछ अन्य कंपनियों के नाम पर इस तरह के अबूझ ट्रांजेक्शन के सताए हैं।
साइबर क्राइम सेल अनट्रेंड
साइबर ठगी के शिकारों की सबसे बड़ी दिक्कत तब होती है जब वो राहत पाने की आस में साइबर क्राइम सेल में संपर्क साधते हैं। अभिनव ने भी ऐसा किया। तब वहां बताया गया कि उन्होंने जरूर ऑनलाइन इंटरनेशनल खरीदारी की होगी। उन्हें पिन और ओटीपी किसी से न साझा करने का सुझाव देकर भेज दिया गया।
पल्ला नहीं झाड़ सकेगा बैंक
पिछले दिनों इस तरह की ठगी पर आरबीआई ने ग्राहकों के हित में सर्कुलर जारी किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि बैंक ऐसे मामलों में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकेगा। उसे अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी। इस आदेश से धोखाधड़ी के शिकार उन पीड़ितों को फौरी राहत मिली है। बैंक की ओर से शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ितों को अस्थायी तौर पर रकम लौटा दी गई है। साथ ही मामले की जांच भी चल रही है।
लॉक कराएं इंटरनेशनल पेमेंट का ऑप्शन
आईटी एक्सपर्ट साइंटिस्ट अभिनव मिश्र खुद साइबर ठगी के शिकार हुए तब उन्हें लगा कि उन्हें अपने क्रेडिट कार्ड का इंटरनेशनल पेमेंट ऑप्शन लॉक कराना चाहिए था। अभिनव बताते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग में भी लोग देश के भीतर ही विभिन्न कंपनियों से सामान खरीदते हैं। ऐसे में इंटरनेशनल पेमेंट सुविधा की जरूरत नहीं होती। ऐसे में लोगों को एहतियातन इस सुविधा को लॉक रखना चाहिए। जरूरत पर ही बैंक से इसे खुलवाना चाहिए। साथ ही शॉपिंग साइट की विश्वसनीयता जांच कर ही अपने कार्ड की डिटेल भरनी चाहिए। कार्ड की डिटेल साइट पर कभी भी सेव नहीं करनी चाहिए।