गोरखपुर। छह दिन पहले आयोजित हुई यूपी बोर्ड की बारहवीं (कृषि) की परीक्षा गाइड में छपे मॉडल पेपर से ही कराई गई थी। परीक्षा शुरू होने के आधा घंटा बाद जब प्रश्नपत्र केंद्र पर नहीं होने की जानकारी मिली तो केंद्र व्यवस्थापक ने जानबूझकर झूठी कहानी गढ़ते हुए दूसरे परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र मंगाकर परीक्षा कराने की बात कही। जबकि 16 फरवरी को उस स्कूल पर कक्षा 11 की वार्षिक गृह परीक्षा हो रही थी। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में केंद्र व्यवस्थापक और स्कूल प्रबंधन पर लगातार गुमराह करने की रिपोर्ट दी है। इसके बाद से डीआईओएस ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया ने केंद्र और केंद्र व्यवस्थापक को आजीवन काली सूची में डालने की संस्तुति माध्यमिक शिक्षा सचिव से की है।
कमला देवी इंटर कॉलेज उरुवा में 16 फरवरी को आयोजित इंटरमीडिएट कृषि परीक्षा के शुरू होने के आधा घंटा बाद जब प्रश्नपत्र नहीं मिला तो विद्यार्थियों ने हंगामा किया था। विरोध करने पर उन्हें रेस्टिकेट करने की धमकी की गई। केंद्र व्यवस्थापक को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने दूसरे परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र मंगाकर परीक्षा कराने की सूचना विद्यार्थियों के साथ कंट्रोल रूम पर दी। आनन फानन में लापरवाही में डीआईओएस ने केंद्र व्यवस्थापक को बदल दिया और इसकी जांच को कमेटी बनाई। गड़बड़ी के आरोप तब और पुख्ता हो गए जब विद्यार्थियों ने केंद्र व्यवस्थापक पर गाइड में छपे मॉडल पेपर से परीक्षा कराने का आरोप लगाया। एडीआइओएस ओडी सिंह के नेतृत्व में जांच टीम ने 21 फरवरी को आरोपों की जांच की। वहां सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाया जा सका। जांच में यह बात पुष्ट हुई कि केंद्र व्यवस्थापक जहां से प्रश्नपत्र मंगाने की बात कह रही थीं। वहां 11वीं की वार्षिक गृह परीक्षा परीक्षा थी और उसी का प्रश्नपत्र भेजा गया। जांच रिपोर्ट के बाद यह बात साबित हुई कि परीक्षार्थियों के आरोप सही हैं।
जांच समिति की रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा सचिव को भेजी गई है। इसमें केंद्र और केंद्र व्यवस्थापक को आजीवन काली सूची में डालने की संस्तुति की गई है। वहीं बच्चों के हित में परीक्षा दोबारा कराने या औसत नंबर देने से जुड़ा आवश्यक दिशा-निर्देश मांगा गया है। निर्देश के मुताबिक कड़ी कार्रवाई होगी।
ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया, जिला विद्यालय निरीक्षक