गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के बीच हुई मौतों के मामले में निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद खुद को बचाने की कोशिशों से सुर्खियों में आए डॉ. कफील सबसे अहम किरदार हैं। सोशल साइट्स पर अपने बचाव की कोशिशें के साथ डॉ. कफील मामले में फंसते गए। 10 दिनों तक पुलिस को चकमा देने के बाद गोरखपुर से गिरफ्तार डॉ. कफील को लेकर पुलिस को भरोसा है कि उनसे घटना से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब मिलेंगे।
डॉ. कफील खान की गिरफ्तारी को पुलिस मामले की जांच के लिए बड़ी कामयाबी मान रही है। सबसे ज्यादा मौतें जिस जगह हुईं उस 100 बेड वार्ड के अधीक्षक डॉ. कफील ही थे। इतना ही नहीं वह कॉलेज की पर्चेज कमेटी के सदस्य भी थे, ऐसे में ऑक्सीजन की कमी के बीच हुई मौतों के मामले में नौ लोगों के खिलाफ दर्ज केस में डॉ. कफील पुलिस के लिए सबसे अहम आरोपी है। इंसेफेलाइटिस के इलाज के नाम पर डॉ. कफील को काफी अधिकार भी मिले थे। उन्हें दवा, ऑक्सीजन, उपकरणों की क्रियाशीलता सुचारु रखने की अधिकारिक जिम्मेदारी दी गई थी। इसके साथ ही उनकी रिपोर्टिंग सीधे प्रिंसिपल को थी। मामले में पूर्व प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा की गिरफ्तारी के बाद 100 बेड वार्ड में हुई मौतों से लेकर ऑक्सीजन की कमी के हालात पनपने के पीछे का सच जानने के लिए पुलिस को डॉ. कफील की गिरफ्तारी की दरकार थी। सूत्रों की माने तो ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के बाद डॉ. कफील को इसका अहसास हो गया था। इसलिए सीएम योगी आदित्यनाथ के मेडिकल कॉलेज के दौरे के बाद से ही वो मेडिकल लीव लेकर भूमिगत हो गए थे।
100 बेड वार्ड में हर घंटे खर्च होते थे 17 सिलेंडर
डॉ. कफील जिस 100 बेड वार्ड के अधीक्षक थे, उसमें हर घंटे 17 ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत थी। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी होने पर सबसे ज्यादा समस्या इसी वार्ड में खड़ी होनी थी। इसके बाद भी डॉ. कफील वक्त रहते क्यों नहीं चेते, पुलिस को इस सवाल का जवाब पाने के लिए उन तक पहुंचना जरूरी था।
ऑक्सीजन सिलेंडर की लागबुक से भी घेरे में डॉ. कफील
मेडिकल कॉलेज में आने वाली ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई का ब्यौरा दुरुस्त न होने का जिक्र डीएम ने जब अपनी जांच रिपोर्ट में किया था, तभी डॉ. कफील के घिरने की शुरुआत हो गई। पर्चेज कमेटी के सदस्य होने के साथ सर्वाधिक सिलेंडर के इस्तेमाल वाले वार्ड के अधीक्षक होने के चलते उनका किरदार सवालों के घेरे में आ गया। डीएम ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया था कि एक अप्रैल से नौ अगस्त तक लागबुक में ऑक्सीजन सिलेंडर का ब्यौरा दर्ज नहीं था। इसके चलते डॉ. कफील पर अस्पताल के सिलेंडर अपने नर्सिंग होम में इस्तेमाल करने के आरोप भी लगे।
डॉ. राजीव से आमना-सामना करा सकती है पुलिस
बीआरडी कांड का सच सामने लाने के लिए पुलिस डॉ. कफील और डॉ. राजीव मिश्र का आमना-सामना करा सकती है। पुलिस का मानना है कि इससे कई राज खुलकर सामने आएंगे। ऑक्सीजन की कमी के हालात कैसे बने और इसके लिए किसकी क्या भूमिका थी, इसकी पड़ताल के लिए पुलिस जल्द ही इन्हें आमने-सामने बैठाने की तैयारी में है।
अपनी सफाई में दूसरों पर खूब मढ़ी है तोहमत
डॉ. कफील खुद को घिरता देखकर भूमिगत हो गए। कई बार पुलिस उनके घर पहुंची और परिवारवालों से अनुरोध किया कि डॉ. कफील जांच में सहयोग करें। आईएमए ने उन पर मुकदमा दर्ज होने से पहले एक जांच की थी, तब भई उन्हें नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। यहां भी डॉ. कफील नहीं पहुंचे। अलबत्ता अपनी सफाई पेश करने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल किया। एक के बाद एक चार वीडियो जारी किए। इसमें न सिर्फ उन्होंने खुद को पाकसाफ बताने की कोशिश की बल्कि डीजीएमई से लेकर जिला प्रशासन के अफसरों पर तोहमत भी मढ़ी।