फाइल फोटो कल से लगा लें
घर के सेप्टिक टैंक में गिरने से हुई थी ऋषभ की मौत
घर के बाहर खेलते समय लापता होने की सूचना मिली थी घर वालों को
परिवार ने अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना भी दी थी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। खोराबार के सुरहिया गांव में दो साल के मासूम ऋषभ की सेप्टिक टैंक में गिरने से मौत हुई थी। बुधवार की सुबह घर वालों को लगा कि बाहर खेलने के दौरान वह लापता हो गया था। घर वालों ने अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना भी दी थी, लेकिन देर रात निर्माणाधीन दूसरे मकान के खुले सेप्टिक टैंक में उसका शव मिला। बच्चे की मौत से घर में चीख पुकार मची है। सभी खुद की लापरवाही को कोसते नजर आए।
सुरहिया गांव के मनहट टोला निवासी रामश्रवण का बेटा ऋषभ बुधवार की सुबह 8:30 बजे लापता हो गया। वह घर के बाहर खेल रहा था। घर वालों को करीब दस बजे उसके लापता होने की खबर मिली तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने बच्चे की तलाश शुरू की। पुलिस को भी घटना की जानकारी दी। रात 12 बजे घरवाले उसकी तलाश में घर के पास ही बन रहे रामश्रवण के बड़े पिता श्रवण के निर्माणाधीन मकान में पहुंचे। चाचा संजय साहनी की नजर जब वहां खुले सेप्टिक टैंक पर पड़ी तो बच्चा उसमें दिखाई दिया। वे तत्काल उसे लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
खुला था सेप्टिक टैंक
निर्माणाधीन मकान में कोई रहता नहीं। वहां शौचालय के लिए दो गड्ढे खोदे गए थे। एक ऊपर से ढका है, जबकि दूसरा खुला है। खुले गड्ढे में चार फीट तक पानी भरा था जिसमें गिरने से ऋषभ की मौत हो गई।
दस बजे ही हो गई थी मौत
प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि बच्चे की मौत दस घंटे पहले हो चुकी है। यानी दस बजे के करीब जब घर वालों को बच्चे के लापता होने की खबर मिली थी, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
झूठी सूचना से परेशान हो गए थे घर वाले
घरवाले जब बच्चे की तलाश में निकले थे तो एक शख्स ने उन्हें यह बता दिया था कि एक महिला बच्चे को लेकर गई है। इसी वजह से घरवाले अपहरण की आशंका जता रहे थे। वे निर्माणाधीन मकान में तलाश करने के बजाय उसे आसपास के गांवों में तलाश रहे थे।
बच्चे से लिपटकर रोती रही मां, पिता गुमसुम
ऋषभ की मौत के बाद एक साल की छोटी बच्ची को लेकर मां बेसुध हो जा रही थी। दरवाजे पर ऋषभ का शव आते ही वह लिपटकर जोर-जोर से रोने लगी। वह बच्चे को वापस लाने की जिद करती रही। लोग उसे समझाने की कोशिश करते रहे। पिता रामश्रवण एकदम गुमसुम नजर आए।