गोरखपुर।
जेल से धमकी भरे फोन आने के बाद योगी सरकार की साख पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्वांचल की धरती से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेल को जेल बना देने का एलान किया था। ऐसे में जेल से ही एक माफिया के फोन पर धमकाने का मामला योगी सरकार के लिए चुनौती बन गई है। डीएम ने मंगलवार शाम जेलर को तलब कर पूरी रिपोर्ट मांगी है। उधर, डीआईजी जेल यादवेंद्र शुक्ला ने बुधवार को जेल की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही है।
सूत्रों की मानें तो जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल यूं ही नहीं होता है। जेल प्रशासन इससे मोटी कमाई करता है। मिनट के हिसाब से जेल में फोन के इस्तेमाल पर रुपये वसूले जाते हैं। यही वजह है कि आराम से जेल में बंद अपराधी बेखौफ होकर रंगदारी मांगते हैं। इसकी पुष्टि एक बार नहीं, बल्कि जब भी जेल में छापेमारी हुई है, हर बार होती है।
डॉक्टर से वसूली की मांग को लेकर पुलिस की जांच में सच सामने आने के बाद इस बार पुलिस सख्ती दिखा रही है और बारीकी से साक्ष्य जुटा रही है। इस आधार पर जेल में बंद लोकल अपराधियों को जनपद से बाहर की जेलों में भेजने की सिफारिश भी की जा सकती है।
जेल में पकड़े गए थे 167 मोबाइल सेट
गोरखपुर। 13 अक्टूबर 2016 को ही जेल में 167 मोबाइल पकड़े गए थे। इसी के बाद जेल में जमकर बवाल भी हुआ था। चार दिन तक जेल में कैदी, बंदी का कब्जा था और सीसी कैमरे तोड़ दिए गए थे। इसके बाद भी जेल प्रशासन ने कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया था। जेल सूत्रों की माने तो जेल प्रशासन इससे मोटी कमाई करता है। मिनट के हिसाब से जेल में मोबाइल के इस्तेमाल का रुपया वसूला जाता है। जेलर रहे डॉ. राजेश सिंह ने तब मोबाइल को पकड़ा था।
जब भी की जांच पकड़ा गया मोबाइल
जेल में मोबाइल का इस्तेमाल पहली बार नहीं हुआ है। जब भी जेल की चेकिंग कोई अधिकारी करता है तो यहां पर आपत्तिजनक सामान और मोबाइल मिल जाता है। तमाम पत्रावली कार्रवाई को चलती है भी है लेकिन कार्रवाई न होने की वजह से इसपर अंकुश नहीं लग पाता है। एक बार फिर जेल से धमकी देने का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन खुद का पल्ला झाड़ रहा है और जांच की दलील दे रहा है। जबकि बिना जेल प्रशासन के सहयोग से मोबाइल जेल में जा रही नहीं सकता है।
जैमर सिर्फ दिखावे के
जेल में कहने को तो मोबाइल के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए जैमर लगाए गए थे लेकिन यह सिर्फ दिखावे के ही हैं। 4जी के इस दौर में 2 जी नेटवर्क को जाम करने का जैमर लगाया गया है। अपराधी हाईटेक हो चुके है मगर जेल की व्यवस्था नए जमाने में भी पुरानी ही इस्तेमाल हो रही है। इसे लेकर जेल प्रशासन की ओर से पत्र भी लिखा गया था।
एक डॉक्टर ने दी थी दस लाख की रंगदारी
शहर के डॉ. शिव शंकर शाही से रंगदारी मांगने की जांच में जुटी पुलिस को कई पुराने मामले भी मिल गए हैं। करीब पांच महीने पहले एसएसपी रहे रामलाल वर्मा के समय में बड़लगंज के एक डॉक्टर से संजय यादव ने रंगदारी वसूली थी। तब भी बीस लाख रुपये मांगे गए थे और बाद में दस लाख रुपये में सौदा तय हो गया था। गोला के रहने वाले एक शख्स ने रुपया लिया था। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
डॉ. शाही ने एसएसपी की शिकायत
डॉक्टर शिव शंकर शाही ने सीएम को मेल भेजकर एसएसपी आरपी पांडेय की शिकायत की है। मेल के जरिए उन्होंने कहा है कि 29 जून को शिकायत के बाद भी एसएसपी ने कार्रवाई नहीं की। जबकि मैं खुद मिलकर उनसे पूरी घटना की जानकारी दी थी।
प्रमुख घटनाएं
21 जनवरी 2015 : मुलाकातियों की जांच पड़ताल में आपत्तिजनक सामान पकड़े गए।
07 मार्च 2015 : जेल के वॉच टावर पर ड्यूटी कर रहे बंदी रक्षक से लूटपाट हुई।
16 अप्रैल 2015 : जेल की जांच में गांजा, चरस बरामद हुआ।
08 जून 2015 : जेल में चार मोबाइल, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू चाकू पकड़े। 13, 990 रुपए और चेकबुक मिले।
14 मई 2016 : चाकू, लाइटर, फोन चार्जर और कैंची के तन्हाई बैरक में टीवी और सेट टॉप बाक्स मिला।
24 मई 2016: हाई सिक्योरिटी बैरक में सात बंदियों के पास से मच्छरदानी व कई आरामतलबी के सामान बरामद किए।
13 मई 2016: डीएम और एसएसपी के छापे, चाकू, मोबाइल चार्जर, कलर टीवी, सेटअप बाक्स बरामद
24 फरवरी 2016: छह मोबाइल सेट, सिमकार्ड, चाकू सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद
02 जुलाई 2017: झंगहा एरिया के प्रधान को फोन किया गया.
29 जून 2017: बेलीपार एरिया के व्यापारी को फोन पर धमकी मिली
28 जून 2017: शहर के वरिष्ठ चिकित्सक से रंगदारी मांगी गई.
06 दिसंबर 2016: मेयर डॉक्टर सत्या पांडेय को जानमाल की धमकी दी गई.
10 नवंबर 2016: पीपीगंज एरिया के सर्राफा कारोबारी को जेल से फोन किया गया.
18 मई 2016: बड़हलगंज एरिया के एक डॉक्टर को धमकी दी गई
जेल से धमकी देने का मामला गंभीर है। इसकी जांच मैं खुद करूंगा। बुधवार को जेल में जांच की जाएगी। पुलिस से उसकी रिपोर्ट से मदद भी लिया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- यादवेंद्र शुक्ला, डीआईजी जेल, गोरखपुर