जोन के 30 पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम से निपटने की ट्रेनिंग दी जाएगी। आठ जुलाई से पुलिस लाइंस में ट्रेनिंग शुरू होगी। इसके लिए जोन के सभी जिलों के पुलिस कप्तानों से आईजी ने दो से तीन पुलिसकर्मियों के नाम मांगे हैं। इन्हें दिल्ली, लखनऊ से आए एक्सपर्ट ईमेल से मिलने वाली धमकी, इंटरनेट कॉल और जालसाजी के मामले को निपटाने का तरीका बताएंगे।
आईजी मोहित अग्रवाल की पहल पर साइबर जोन टेक्नोलॉजी लिमिटेड नाम की संस्था के एक्सपर्ट साइबर क्राइम से निपटने का उपाय बताएंगे। 8, 9 और 10 जुलाई को होने वाली ट्रेनिंग के पूरा होने के बाद इसमें शामिल पुलिसकर्मियों की परीक्षा ली लाएगी। पास होने वाले पुलिसकर्मियों को आईजी प्रमाण पत्र सौंपेंगे। इसके लिए जोन के 11 जिलों के पुलिस कप्तानों से ऐसे इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाही का नाम मांगा गया है, जिन्हें साइबर क्राइम की समझ होने के साथ ही काम करने में रुचि हो। अधिकारी ट्रेनिंग के बाद साइबर क्राइम के मामले का पर्दाफाश जल्द होने की उम्मीद जता रहे हैं। तकनीकी जानकारी का अभाव होने से जोन में करीब 80 से ज्यादा मामले अधर में पड़े हैं, जिसमें गोरखपुर के 40 से ज्यादा मामले हैं।
धमकी देने वाले की तत्काल मिल सकेगी जानकारी
ईमेल के साथ ही इंटरनेट कॉल से धमकी देने वाले व्यक्ति का लोकेशन साइबर क्राइम के एक्सपर्ट पुलिसकर्मी तुरंत लगा सकेंगे। ट्रेनिंग में इन दोनों मामलों के बारे में विशेष जानकारी दी जाएगी। जानकारी न होने के कारण पुलिस ऐसे मामलों में अब तक अटक जाती थी। इसके अलावा साक्ष्य जुटाने के लिए कंप्यूटर के सही तरीके से सीज न हो पाने के कारण पूरा रिकार्ड भी नहीं मिल पाता था।
'साइबर क्राइम से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को तीन दिन ट्रेनिंग दी जाएगी। संस्था की मदद से दिल्ली, लखनऊ से आने वाले एक्सपर्ट धमकी, फ्राड करने वालों पर कार्रवाई के साथ ही साक्ष्य जुटाने का तरीका बताएंगे। ट्रेनिंग लेने वाले पुलिसकर्मियों की परीक्षा भी ली जाएगी। सफल लोगों को पुरस्कृत करने के साथ ही प्रमाण पत्र दिया जाएगा।'
- मोहित अग्रवाल, आईजी जोन