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बीआरडी कांड- गजानन ने आत्मसमर्पण किया

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गोरखपुर। बीआरडी कांड के सातवें आरोपी चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल ने बुधवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। विशेष न्यायाधीश शिवानंद सिंह ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। गजानन ने उसी समय समर्पण किया जिस समय कोर्ट में विवेचक फोर्स के साथ मौजूद थे। वह गजानन जायसवाल को फरार घोषित करने की अर्जी भी तैयार कर लाए थे। उनके समर्पण करने के बाद अर्जी में संशोधन कर उनका नाम फरार लिस्ट से काटा गया। उधर, मंगलवार को गिरफ्तार किए गए लिपिक संजय त्रिपाठी को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। वहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
ऑक्सीजन की कमी के बीच बच्चों की मौत के मामले में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता की तहरीर पर निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा, मनीष भंडारी, डॉ. कफील खान, डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, डॉ. सतीश कुमार, गजानन जायसवाल, सुधीर, उदय शर्मा, संजय त्रिपाठी के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया था। इस मामले में सात आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि दो फरार हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस की विवेचना में कई आरोपियों के खिलाफ धाराएं बढ़ा दी गई हैं।
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पूर्व प्रिंसिपल सहित तीन आरोपी कोर्ट में पेश
निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव कुमार मिश्रा, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, डॉ. सतीश कुमार को बुधवार को जेल से कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजते हुए 18 को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।

डॉ. सतीश पर बढ़ाई गईं चार धाराएं
बीआरडी कांड के आरोपी डॉ. सतीश कुमार पर विवेचना के दौरान चार धाराएं बढ़ाई गई हैं। पुलिस ने डॉ. सतीश को कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, अभिलेख में कूटरचना करने जैसी धाराओं का आरोपी बनाया है। विवेचक सीओ कैंट ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि डॉ. सतीश कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। विवेचना के क्रम में उनका बयान लेना आवश्यक है। कोर्ट ने विवेचक की अर्जी को स्वीकार करते हुए जेल में जाकर डॉ. सतीश का बयान लेने की अनुमति दे दी। विवेचक ने डॉ. सतीश पर शिकंजा कसते हुए उनके खिलाफ कई अन्य धाराएं बढ़ाकर संशोधित रिमांड पेश किया और कस्टडी रिमांड की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया। इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
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डॉ. सतीश पर धारा 466 : लोकसेवक द्वारा रखे जाने वाले अभिलेख या जन्मों के रजिस्टर आदि में कूटरचना करना (सात साल की सजा व जुर्माना), धारा 468 : छल के लिए कूटरचना (सात साल की सजा), धारा 469 : किसी व्यक्ति की ख्याति को अपहानि पहुंचाने के उद्देश्य से कूटरचना (तीन साल की सजा व जुर्माना), धारा 471 : कूटरचित दस्तावेज को असली के तौर पर पेश करना (तीन साल की सजा व जुर्माना) की धाराएं बढ़ाई गई हैं।
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