गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के बीच हुई मौतों के बाद निरीक्षण के लिए पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्राइवेट प्रैक्टिस पर डॉ. कफील को फटकार लगाई थी, साथ ही ऑक्सीजन की कमी के मामले की जांच के बाद सख्त कार्रवाई का इरादा बताया था। इसके अगले ही दिन से मेडिकल लीव लेकर डॉ. कफील गायब हो गए थे। मामले की उच्चस्तरीय जांच में भूमिका संदिग्ध मिलने पर निलंबन होने के बाद से भूमिगत हो गए। संवेदनशील मसला देख इस मामले की जांच आईएमए ने भी लेकिन डॉक्टरों के इस संगठन के बुलावे के बावजूद कफील अपना पक्ष रखने तक नहीं पहुंचे।
केस दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच में सहयोग न करके वह लगातार फरार रहे। इस बीच सोशल मीडिया पर लिखा-पढ़त बढ़ाकर खुद को निर्दोष साबित करने की मुहिम छेड़ दी। एक के बाद एक के क्रम में चार वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी किए थे। इन वीडियो में उन्होंने खुद को पाकसाफ बताया और कइयों पर गंभीर आरोप लगाए। जांच के क्रम में पुलिस उनसे संपर्क करने के लिए उनके घर और अस्पताल की खाक छानती रही, लेकिन वह पुलिस से दूरी बनाए रहे। पुलिस ने उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास भी किया, लेकिन नंबर ऑफ जाता रहा। हालांकि, इस बीच वह अपने लोगों से वाट्सएप के जरिए संवाद करते रहे। पुलिस जांच से दूरी ने उनकी भूमिका को और संदिग्ध बना दिया।
डॉ. कफील के नर्सिंग होम पर लटका ताला
डॉ. कफील के भूमिगत होने के साथ ही रुस्तमपुर स्थित उनके नर्सिंग होम मेडिस्प्रिंग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर पर ताला लटक गया। जांच टीमों के अलावा पुलिस उनसे संपर्क करने के लिए यहां कई बार पहुंची, लेकिन हर बार ताला ही लटका मिला। इस दौरान मेडिस्प्रिंग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के बोर्ड समेत शहर में इसके प्रचार के लिए लगे फ्लैक्स भी उखाड़ दिए गए थे। जिस दिन डॉ. कफील भूमिगत हुए थे, उसी दिन आनन-फानन अस्पताल में भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया था।
प्रोबेशन पीरियड में 75 मेडिकल लीव की हुई थी शिकायत
अमर उजाला ने डॉ. कफील की मनमानी छुट्टियाें के जांच के घेरे में होने के बाबत खबर भी छापी थी। प्रोबेशन पीरियड के दौरान ही 75 छुट्टियां लेने वाले डॉ. कफील खान के खिलाफ मेडिकल कॉलेज प्रशासन को कार्रवाई करने के लिए उनके विभागाध्यक्ष ने पत्र लिखा था। डॉ. कफील ने 75 मेडिकल लीव ली, लेकिन वापस काम संभालने के समय फिटनेस सर्टिफिकेट भी जमा नहीं किया। घटना के बाद सीएम मेडिकल कॉलेज पहुंचे और डॉ. कफील को प्राइवेट प्रैक्टिस पर लताड़ा तो वो फिर ‘बीमार’ हो गए। इस मेडिकल लीव के दौरान उनका निलंबन भी हो गया।