गोरखपुर। गोला थानाक्षेत्र के रामामऊ गांव के रामजानकी मंदिर से 29 सितंबर को मूर्तियां चोरी होने के मामले में पुलिस और स्वॉट टीम ने चार आरोपियों को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें बड़हलगंज के भरोह पुलिया के पास से पकड़ा गया। हालांकि पांच अन्य आरोपी मौका पाकर भाग गए। पकड़े गए बदमाशों के पास से पुलिस ने स्कार्पियो, चोरी गई 11 मूर्तियां और डेढ किलो गांजा बरामद किया है।
शनिवार शाम को पुलिस ऑफिस में घटना का पर्दाफाश करते हुए एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि मूर्तियां चोरी होने के बाद बदमाशों को पकड़ने के लिए पुलिस टीम को लगाया गया था। मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध लोग स्कार्पियो से चोरी के मूर्तियों को बेचने के लिए जा रहे हैं। पुलिस और स्वॉट टीम भरोह पुलिया के पास वाहन चेकिं ग करने लगी। तभी गाड़ी आती दिखी। रोकने का इशारा करने पर उसकी स्पीड बढ़ा दी गई। उसमें सवार भागने लगे।
पुलिस ने पीछा कर गाड़ी में बैठे कुछ लोगों को पकड़ लिया। हालांकि मौका पाकर पांच बदमाश फरार हो गए। एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए बदमाशों की पहचान बड़हलगंज के वार्ड नंबर दो निवासी संजय निगम, गोला के चंद चौराहा निवासी सिद्धार्थ उर्फ सिद्घू, बड़हलगंज के महुआपार निवासी पंकज शाही और गोला के चंद चौराहा निवासी अभिषेक उर्फ पुष्कर यादव के रूप में हुई। एसएसपी ने बताया कि फरार आरोपियों की पहचान सहड़ौली, गोला निवासी चंदन राय, भिमटी बड़हलगंज निवासी मयंक दूबे, महुआपार बड़हलगंज निवासी गोलू शाही, मरवटिया निवासी नितेश यादव और मुक्तिपथ निवासी विशाल के रूप में हुई हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए टीम लगा दी गई है।
देवरिया के मंदिर में भी चोरी की बनाई थी योजना
एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि फरार आरोपियों में चंदन राय शातिर है। वह लूट के अपराध में पहले भी जेल जा चुका है। वही इस पूरी घटना का मास्टर माइंड है। इसके पहले ये बदमाश देवरिया जिले में एक मंदिर से मूर्ति चोरी की योजना बना चुके थे। गोला स्थित रामजानकी मंदिर में सुरक्षा का व्यापक इंतजाम नहीं था। इस लिए बदमाशों ने पहले से ही रेकी कर चोरी करने की तैयारी की और फिर उसे अंजाम दिया। एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए आरोपी पंकज शाही पर पहले से ही फर्जी कागजात लगाकर लोन लेने सहित दो केस दर्ज हैं। संजय निगम पर भी दो केस दर्ज हैं। एसएसपी ने बताया कि ये सब मूर्तियों को अष्टधातु की मानकर चुराए थे और उन्हें बड़हलगंज में ही बेचने का प्रयास किया था। पर मात्र एक ही मूर्ति अष्टधातु की निकली, इस लिए बेचने में सफल नहीं हो पाए।