बेटे को गोली लगी है और वह खुद थाने में बंद है। इसके बावजूद मां गुड्डी को सिर्फ बेटे गौतम के सलामती की ही फिक्र है। थाने में भी वो सिर्फ गोली से घायल बेटे गौतम की जिंदगी की दुआ करती रही। उसे कोई पछतावा नहीं है। बेटा गौतम सलामत बच जाए इसकी ही दुआ है। कुछ यही हाल 15 दिन पहले मायके से लौटी बहू का भी है। खुद गर्भवती होने का दर्द भूलकर वह सुहाग की सलामती की दुआ मांग रही है। फिलहाल गौतम लखनऊ के एक अस्पताल में जिंदगी-मौत के बीच जूझ रहा है।
घर में हादसे के बाद से प्रेमिका गुमसुम हो गई है। घर के अंदर सूरज बुलाने पर आया या वो खुद ही घुसा था। यह सवाल अभी भी अबूझ पहेली बना हुआ है। किशोरी किसी से कोई बात नहीं कर रही है। थाने में लाने पर भी वह चेहरे को दुपट्टे से ढककर फर्श पर ही सोई रही। मां ने भी उससे ज्यादा बात करने की कोशिश नहीं की। हालांकि भाभी लगातार उसे समझाने की कोशिश करती दिखी। गौतम तीन भाईयों में दूसरे नंबर पर था। बड़ा भाई जयपाल शादी के बाद से बाहर है और छोटा भाई उत्तम घर पर ही रहता है। गौतम भी 15 मई को पत्नी को मायके से लाने के लिए हैदराबाद से आया था। दो दिन बाद ही उसे दोबारा हैदराबाद काम पर लौटना था।
तीन बहनों का इकलौता भाई था सूरज
मारा गया सूरज तीन बहनों में सबसे बड़ा इकलौता भाई था। बड़ी बहन बबिता बीए तृतीय वर्ष में है। दूसरी सरिता बीए प्रथम वर्ष और सबसे छोटी बहन ममता दसवीं की छात्रा है। सरिता के मुताबिक भाई ने पढ़ाई छोड़ दी थी। कोलकाता में एक रिश्तेदार के पास कमाने भी गया था और एक महीने पहले ही ननिहाल में शादी होने पर घर आया था। 15 दिन पहले ही उसका एक्सीडेंट हुआ था जिस वजह से वह चल फिर नहीं पा रहा था।
रोते बिलखते बेसुध हो गई सूरज की बहन
इकलौते भाई की मौत से सूरज की बहनें रो रोकर बेसुध हो जा रही थी। बुआ प्रभावती उन्हें संभालने की कोशिश कर रही थीं। इसी बीच छोटी बहन ममता रोते हुए बेहोश हो गई। आसपास के लोगों ने किसी तरह उसे संभाला। वहीं सूरज की मां बेटे की मौत से आहत होकर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मृतक समेत सात पर केस दर्ज
दोनों पक्षों की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। घायल गौतम की पत्नी ज्ञांती की तहरीर पर पुलिस ने मृतक सूरज पर घर में घुसकर हत्या की कोशिश करने की धाराओं में रिपोर्ट लिखी है। वहीं मृतक प्रेमी सूरज की मां मीरा की तहरीर पर पुलिस ने गौतम के पिता प्रेम नारायण, भाई गौतम, उत्तम और तीन पड़ोसियों आकाश, उत्तम और दुर्गेश के खिलाफ हत्या, मारपीट, बंधक बनाने की धाराओं में केस दर्ज किया है। मीरा ने बेटे की प्रेमिका, उसकी मां और भाभी को आरोपी नहीं बनाया है।
एक साल पहले ही पड़ गई थी खूनी रंजिश की नींव
गोरखपुर। चिलुआताल के शेमरापुर चमराहे गांव में खूनी संघर्ष की नींव एक साल पहले ही पड़ गई थी। सूरज 9वीं में पढ़ने वाली लड़की के प्रेम में इस कदर पड़ा था कि मोबाइल फोन खरीदने के लिए वह अपराध की राह पर निकल गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद उसने लूट की रकम से मोबाइल फोन खरीदकर प्रेमिका को दिया था। इसकी जानकारी होने पर लड़की के घरवालों ने पुलिस से फरियाद भी की थी। तब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। बाद में लड़की के परिवार के सदस्यों को सूरज ने धमकी दी थी। उसने कहा था कि पुलिस को दस हजार रुपये देकर आया है, उसका कुछ नहीं होगा। तब से परिवार दहशत में था। फिर लड़की को मुंबई उसके मामा के पास भेज दिया गया था।
घर में बहू की तरह छिपाकर रखते थे बेटी
मां गुड्डी ने बताया कि सूरज की वजह से ही उन्होंने बेटी को मुंबई भेजा था। मायके में भतीजी की शादी 19 मई को थी। उसी में शामिल होने के लिए परिवार आया था। साथ में लड़की भी चली आई। फिर रिश्तेदार ने भी कहा कि कब तक बेटी को बाहर रखेंगे, उसे घर में ही रखा जाए। बेटी को बहू की तरह छिपाकर रखती थी। ताकि सूरज की उस पर नजर न पड़े।
‘पहले दादी को मारा, अब भाई की हत्या कर दी’
गांव वाले और पुलिस हत्या की वजह प्रेम संबंध को ठहरा रहे है। वहीं प्रेमी सूरज के घर वाले अलग ही कहानी बता रहे हैं। बीए प्रथम वर्ष में पढ़ने वाली सूरज की बहन सरिता का कहना है कि उसका भाई तीन बजे गांव में शौच के लिए जा रहा था। उसी दौरान लड़की के घरवालों ने पकड़कर उसे घर में बंद कर दिया। वहां से सूरज ने फोन कर मां को सूचना भी दी। पुलिस को कॉल करने की कोशिश की गई, पर फोन नहीं मिल पाया। सुबह मां चौकी पर सूचना देने गई थी। उसी बीच सूरज का शव लड़की के घर से बरामद हो गया। सरिता ने आरोप लगाया कि उसके भाई को फंसाने के लिए गौतम ने खुद को गोली मारी है। सरिता का यह भी आरोप है कि उसकी दादी फूला की भी बीस साल पहले पीटकर हत्या कर दी गई थी। तब से रंजिश चली आ रही है। उसी रंजिश में उसके भाई को भी मारा गया है। सरिता के पिता की मौत काफी पहले ही हो चुकी है।
गांव में सन्नाटा, ग्रामीण बोलने से कतराते रहे
हत्या और गोली चलने की घटना के बाद से ही गांव के एक टोला में सन्नाटा है। सभी अपने घरों में थे और कोई भी कुछ बोलने से बचता रहा। वहीं गौतम के घर में ताला बंद है। पिता उसे लेकर लखनऊ गए हैं और मां, पत्नी, बहन पुलिस की हिरासत में हैं। घर के बाहर बांधी गई भैंस को चारा व पानी देने वाला भी कोई नहीं बचा है।
पहले भी हो चुकी है इस तरह की घटनाएं
गोरखपुर। पहले भी छेड़खानी और प्रेस संबध के पकड़े जाने पर हत्याएं हो चुकी हैं। 23 मई 2015 को झंगहा के लक्ष्मीपुर दूबे टोला में बहन के साथ छेड़खानी से आजिज भाई संदीप ने गांव के ही रामप्रवेश यादव की सरेशाम चाय की दुकान पर चाकू घोंप कर हत्या कर दी थी। जबकि एक अन्य युवक भीम घायल हो गया था। नाराज ग्रामीणों ने संदीप के घर पर तोड़फोड़ की थी। कई दिनों तक गांव में पुलिस तैनात रही। बाद में हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा था।
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