शिवम सिंह
गोरखपुर।
संचार क्रांति का दुरुपयोग करने वाले अपराधियों की सोच पुलिस के साइबर एक्सपर्ट से कहीं ज्यादा आगे है। यही वजह है कि साइबर अपराधियों की गिरेबां तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच रहे हैं। रोजाना ही आम लोगों के खाते से रुपये उड़ाए जा रहे हैं और सिर्फ थाना पुलिस केस दर्ज कर साइबर सेल को मामला ट्रांसफर कर दे रही है। इससे इन मामलों में कार्रवाई नहीं हो पा रही। पुलिस अफसर भी इसे लेकर परेशान हैं। वे ट्रेनिंग के जरिए इसे मजबूत करने की दलील दे रहे हैं।
करीब तीन साल पहले गोरखपुर में साइबर सेल की शुरुआत हुई थी। तब यह सोच थी कि साइबर एक्सपर्ट एडवांस सॉफ्टवेयर के जरिए पुलिस एटीएम, नेट बैंकिंग, सोशल साइट्स, मोबाइल से अपराध करने वालों को बहुत कम समय में पकड़ सकती है। इसके इतर आज तक साइबर सेल के पास ऐसे सॉफ्टवेयर नहीं आ सके, जिससे इन सारे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके या फिर उसका खुलासा हो सके। साइबर सेल महज सोशल मीडिया के अपराधों पर ही पकड़ बना पाई है। सोशल मीडिया के अपराधी लोकल होते हैं, शायद यही वजह है कि इसे आसानी से पकड़ भी लिया जाता है लेकिन बाहर के अपराधियों को पकड़ पाने में सेल फेल हो जाता है। वहीं कई बार पुलिस उन पतों पर जाकर भी कुछ नहीं पाती है।
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लखनऊ में ट्रेनिंग के बाद हुई थी शुरुआत
लखनऊ के हजरतगंज में यूपीटेक संस्था में ट्रेनिंग के बाद दो एक्सपर्टों ने यहां काम शुरू किया। समय-समय पर जिले स्तर पर भी इनकी ट्रेनिंग कराई जाती है लेकिन सोशल मीडिया के अलावा किसी भी अपराध को रोक पाने में इनकी भूमिका सामने नहीं आ रही है।
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700 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामले लंबित
जोन में 500 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामले लंबित पड़े हैं। पिछले चार सालों में साइबर क्राइम के मामले ज्यादा बढ़े हैं। वर्ष 2012 में केवल एक मामला दर्ज हुआ था। 2013 में यह संख्या 109 मामले, 2014 में 127 मामले, 2015 में 198 मामले दर्ज हुए। वर्ष 2016 में मात्र छह महीने के भीतर यह संख्या 210 पहुंच गई है। गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन रेंज में 700 से ज्यादा मामले लंबित है।
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सोशल मीडिया के अपराधियों को पकड़ने में सफल
सोशल मीडिया पर अश्लील फोटो या फिर उसके जरिए क्राइम करने वाले अपराधियों को पकड़ने में साइबर सेल की भूमिका सफल है। बीते एक साल के अंदर बीस से ज्यादा अपराधियों को पुलिस ने साइबर सेल की मदद से पकड़ा है। इसमें ज्यादातर मामले में महिलाओं से जुड़े हैं।
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24 घंटे में करें शिकायत तो मिल जाएगी रकम
साइबर सेल के एक्सपर्ट बताते है कि यदि बैंक, एटीएम से ऑनलाइन ठगी हुई है तो 24 घंटे के भीतर जानकारी दें। अगर इस समय अवधि में साइबर सेल पर शिकायत पहुंच जाती है तो एक्सपर्ट आधे से ज्यादा रकम की बरामदगी कर लेते हैं। लोग थाना पुलिस के चक्कर में ही ज्यादा समय गंवा देते हैं, जिस वजह से दिक्कत आती है।
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फर्जी खातों का करते हैं इस्तेमाल
ऑनलाइन ठगी करने वाले अक्सर फर्जी नाम पते के खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे तमाम मामले हैं जिसमें साइबर सेल के एक्सपर्ट ठगों तक पहुंच जाते हैं लेकिन जब पुलिस जाती है तो नाम-पता फर्जी होने की वजह से बैरंग ही लौट आती है।
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ये बरतें सावधानी
- एटीएम कोड या बैंक एकाउंट न बताएं
- किसी दूसरे के मोबाइल या लैपटॉप से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन न करें
- स्पंम मेल कम से कम खोलें
- पॉर्न और इस तरह की अन्य वेबसाइट खोलने से बचें
- अनाथराइज्ड और बैन वेबसाइटों के लिंक न खोलें
-फेसबुक और सोशल नेटवर्किंग पर डाले गए लिंक न खोलें
- सिस्टम को अपग्रेड करें। अपडेट वर्जन यूज करें।