शहीद बेटे का दर्द भुला न पाए, छोटी बहू की मौत ने दिया जख्म
- उत्तराखंड की त्रासदी में हेलीकॉप्टर क्रैश होने से बड़े बेटे सुधाकर हो गए थे शहीद
- छोटी बहू की खुदकुशी से टूट गया परिवार
आफताब आलम अंसारी
मगहर । क्षेत्र के अशरफाबाद गांव निवासी रिटायर्ड शिक्षक महानंद यादव की छोटी बहू की मौत हो जाने से घर पर कोहराम मच गया। करीब चार साल पहले भी इस घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था जब एयरफोर्स में सार्जेंट बड़े बेटे सुधाकर हरिद्वार में त्रासदी के दौरान हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद हो गए थे। परिवार अभी बड़े बेटे के बिछड़ने के गम से उबर ही रहा था कि छोटी बहू ने फंदा लगाकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली।
ससुर महानंद ने रोते हुए बताया कि बहू सुमन के दो बेटे है। बड़ा बेटा अपूर्व चार वर्ष और छोटा बेटा महज दस माह का प्रशांत है। अब इन मासूमों का क्या होगा, बुढ़ापे में ईश्वर ने यही दिन दिखाया है। बहू की खुदकुशी पर अफसोस जताते हुए कहाकि भगवान का दिया सब कुछ है। छोटी बहू सुमन के इलाज में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी । इलाज के लिए जब भी जाते तो बहू के पिता को जरूर ले जाते थे। बहू ऐसा कदम उठाएगी यह तो सोचा भी नहीं था। यह संयोग है कि बड़ा बेटा भी अपने पीछे दो बेटों को छोड़कर दूर चला गया और अब छोटी बहू भी अपने पीछे अपने दो मासूमों को छोड़ कर इस दुनिया से चली गई। परिवार का अब क्या होगा। आगे बताया कि उनका परिवार सीमित था। घर पर सिर्फ वह और उनकी पत्नी और छोटी बहू सुमन ही रहती हैं। बड़ी बहू अपने दोनों बेटों को लेकर गोरखपुर एयरफोर्स कॉलोनी में रहती है।
उधर सुमन के माता-पिता और भाई का रो- रोकर बुरा हाल है। सुमन के सिपाही पिता रामनिवास यादव चर्चित पहलवान भी है । उन्होंने रोते हुए कहा कि काश आज बेटी को ससुराल के लोगों ने विदा कर दिया होता, तो शायद उनकी बेटी जिंदा होती। आगे बताया कि उनके दो बेटियों में सुमन छोटी थी। जिसे पूरा परिवार प्यार करता था। यह कहते हुए फफक कर रो पड़े। दोनों परिवार का हाल देख कर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।
शोभित कुमार पांडेय