गोरखपुर। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में दलालों के जमावड़े की शिकायत के बाद डीएम के विजयेंद्र पांडियन के निर्देश पर एंटी करप्शन टीम ने छापामारी की। कैंट पुलिस के साथ पहुंची टीम ने छह लोगों का दबोच लिया और थाने ले आई। देर शाम सभी का शांतिभंग में चालान कर दिया गया।
मंगलवार सुबह करीब 10:45 बजे कैंट पुलिस के साथ एंटी करप्शन की टीम आरटीओ पहुंची। औचक छापेमारी कर विभिन्न अनुभागों में मौजूद छह बाहरी व्यक्तियों शेष पाल, कुन्नू, राकेश गौड़, धीरेंद्र चौधरी, अवधेश व वेद प्रकाश को वाहन संबंधी फ ाइलों के साथ पकड़ लिया और अपने साथ ले गई। फि लहाल पकड़े गए व्यक्तिओं के पास मिली फ ाइल फर्जीवाड़े से जुड़ी है या नहीं, इसका पता नहीं चल सका है। आरटीओ भीमसेन सिंह का कहना है कि पकड़े गए सभी बाहरी थे।
...तो ये कर्मचारियों के लिए करते थे काम
एंटी करप्शन की टीम की ओर से पकड़े गए छह बाहरी व्यक्तियों में चार ऐसे हैं, जिन्हें विभिन्न अनुभाग के कर्मचारियाें ने अपने सहायक के रूप में रखा था। विभागीय सूत्रों का कहना है कि लगभग सभी अनुभाग के कर्मचारियों ने अपना काम निपटाने के लिए अनधिकृत तरीके से सहायक रखे हैं। पकड़े गए धीरेंद्र व अवधेश डीएल रिनुअल अनुभाग में कार्यरत कर्मचारी का सहायक है। शेष पाल भी डिस्पैच में काम करता है। राकेश गौड़ स्टेनो कहे जाने वाले कर्मचारी के सहायक है। एक अन्य कार्यालय परिसर में वाहन के नंबर प्लेट पर नंबर लिखता है। पकड़े गए लोगों में एक ही बाहरी बताया जा रहा है।
निर्धारित दर का दो से तीन गुना वसूलते हैं ‘बाहरी’
आरटीओ में अधिकांश व्यवस्था ऑनलाइन की जा चुकी है, लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद विभाग के कर्मचारी बाहरी व्यक्तियों के माध्यम से वसूली का धंधा चला रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए निर्धारित 700 रुपये के स्थान पर 1500 से 2000 रुपये तक लिया जाता है। ड्राइविंग लाइसेंस खो जाने पर दूसरे प्रति के लिए भी 700 से 800 रुपये वसूला जाता है। कुछ मामलों में यह रकम 1000 से 1500 रुपये तक पहुंच जाती है। इन सबके लिए कर्मचारियों का अपना ‘शुल्क’ फिक्स है।