अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
हाई प्रोफाइल बनने के चक्कर में पवन सिंह अपराध की दुनिया में फंसता चला गया। कॉलेज की छोटी गुंडई के दौर से ही रुपयों के दम पर पुलिस में पैठ बनाकर वह आगे बढ़ा। फिर सूद के कारोबार से ठगी के मामले सामने आने लगे। पोस्टर लगाकर हाईलाइट होने के चक्कर में ही वह पुलिस अफसरों के नजरों में आ गया और कई पुराने मामले भी खुलने लगे। पवन पर छह आपराधिक मामले दर्ज है। पांच मुकदमों में चार्जशीट लग चुकी है। एक मामला अभी भी विचाराधीन है। एसएसपी रहे प्रदीप यादव की नजर पोस्टर के जरिए ही पड़ी थी और फिर इनकी फाइलें खुल गई। यह गोरखनाथ थाने का हिस्ट्रीशीटर भी हो गया।
गिरफ्तारी के बाद पवन सिंह और उसके भाई से गोरखनाथ थाने से चिलुआताल थाने लेकर पुलिसिया अंदाज में पूछताछ की थी। एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज भी पहुंचे थे। उसके आय के स्रोत, कारोबार, नेटवर्क की पूरी पड़ताल इसी के बाद से शुरू हो गई। खबर है कि मामले को मैनेज करने के लिए पवन ने पुराने अंदाज में 50 लाख रुपये की पेशकश भी कर दी थी लेकिन एसएसपी के ईमानदार तेवर की वजह से कोई भी इस मामले में बीच में नहीं पड़ा और पवन को पूरी कार्रवाई कर दी गई। रुपये हड़पने का मामला उजागर होने के बाद ही पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति की आशंका जताई थी। जिसके बाद आयकर विभाग ने खातों को सीज कर दिया है और जांच पड़ताल शुरू हो गई है। इस पूरे प्रकरण में पवन का फंसना तय है।
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आजमगढ़ तक पोस्टर लगाकर फंसा था पवन
पवन सिंह ने खुद का नाम फैलाने के लिए शहर से लेकर आजमगढ़ तक अपने पोस्टर लगा दिए थे। इसी बीच शाहपुर में डबल मर्डर केस में उसका नाम सामने आ गया और पवन पर एसएसपी ने शिकंजा कस लिया था। लेकिन बाद के समय में आए अफसरों और पुलिस से उसने मैनेज भी खूब किया और कई मामलों में राहत भी पा ली थी।
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होटल में गुंडई में भी पकड़ा गया था पवन
रेलवे स्टेशन स्थित एक होटल में शराब पीने के दौरान हुए विवाद में भी पवन सिंह को पकड़ा गया था तब पुलिस ने उसे जेल जरूर भेजा था लेकिन मामले में पैरवी की वजह से धाराएं कम कर दी गई थी। पुलिस की सेटिंग के वजह से ही पवन का हौसला बढ़ता गया।