गोरखपुर। बहिष्कार के बाद भी गुरुवार को सदर तहसीलदार का न्यायालय चलने से भड़के अधिवक्ताओं ने जमकर हंगामा किया। तहसीलदार सत्येंद्र सिंह से तीखी नोकझाेंक की और उन्हें गालियां भी दीं। शोर सुनकर तहसीलदार की सुरक्षा में आए लेखपालों से भी अधिवक्ताओं ने धक्का-मुक्की की और उन्हें गाली देते हुए भगा दिया। मामला बिगड़ता देख तहसीलदार ने फोर्स बुलाई तो अधिवक्ता उनके कोर्ट के दरवाजे पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर ढाई बजे पुलिस किसी तरह अधिवक्ताओं को शांत करा सकी।
करीब पखवारे भर से अधिवक्ताओं ने सदर तहसीलदार कोर्ट का बहिष्कार कर रखा है। गुरुवार को करीब 10-15 की संख्या में अधिवक्ताओं का एक गुट तहसीलदार के पास गया और कोर्ट संचालित करने की मांग की। कहा कि कोर्ट के बहिष्कार को उनका कोई समर्थन नहीं है। वादों की सुनवाई न होने से वादकारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर तहसीलदार ने कोर्ट शुरू कर दी। कुछ वादों में सुनवाई भी हुई, मगर तभी बहिष्कार करने वाले वकीलों का दूसरा गुट वहां पहुंच गया। वे कोर्ट बंद कराने की कोशिश करने लगे तो तहसीलदार ने विरोध किया। इस पर अधिवक्ता भड़क गए और तहसीलदार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कुछ अधिवक्ताआें ने तहसीलदार और उनके स्टाफ को गालियां भी दीं।
फोर्स न मिलने पर काम ठप करने की चेतावनी
सदर तहसीलदार से हुई अभद्रता के विरोध में लेखपालों समेत तहसील के सभी कर्मचारियों ने बैठक की और घटना की निंदा करते हुए कहा कि इस माहौल में काम करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने डीएम राजीव रौतेला को ज्ञापन भी दिया और कहा कि सुरक्षा न मिलने पर किसी भी तरह का प्रशासनिक व न्यायिक काम नहीं किया जा सकता। वहीं लेखपाल संघ के महामंत्री जगदीश ने बताया कि जब तक सदर तहसील में फोर्स की व्यवस्था नहीं होती लेखपाल कामकाज ठप रखेंगे।
नायब तहसीलदार का गुस्सा तहसीलदार पर फूटा
पखवारे भर पहले एक बकायेदार को छुड़ाने कुछ अधिवक्ता नायब तहसीलदार पिपराइच तपन मिश्रा के पास गए थे। उन्होंने उसे छोड़ने से इनकार कर दिया तो अधिवक्ता उनसे उलझ गए। यही नहीं एक अमीन से उनकी धक्का-मुक्की भी हो गई थी, जिसके बाद नायब तहसीलदार ने पुलिस बुला ली थी। खफा अधिवक्ताओं ने डीएम से नायब तहसीलदार को हटाने की सिफारिश की थी, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर अधिवक्ताओं ने तहसीलदार सदर के कोर्ट का बहिष्कार शुरू कर दिया। सूत्रों के मुताबिक नायब तहसीलदार के कोर्ट का विरोध करने का विशेष असर नहीं दिखाई पड़ा तो अधिवक्ताओं ने तहसीलदार सदर के कोर्ट के विरोध का निर्णय किया था।
बार एसोसिएशन से कार्रवाई की मांग करेंगे तहसीलदार
सदर तहसीलदार सत्येंद्र सिंह का कहना है कि अधिवक्ताओं ने कोर्ट का बहिष्कार कर रखा है, उन्होंने नहीं। वह हमेशा सुनवाई के लिए तैयार थे। कुछ अधिवक्ता आए तो वे कोर्ट में सुनवाई करने लगे। इसी बीच 20-25 की संख्या में अधिवक्ताओं का एक गुट वहां नारेबाजी करते हुए पहुंच गया। वे न्यायिक कार्य ठप कराने के साथ ही उन्हें और उनके स्टाफ को गालियां देने लगे। उन्होंने उत्पात मचाना शुरू कर दिया और मारपीट पर आमादा हो गए, जिस पर फोर्स बुलानी पड़ी। तहसीलदार ने कहा कि मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को देने के साथ ही बार एसोसिएशन को भी संबंधित अधिवक्ताओं के इस कृत्य की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग करूंगा।