गोरखपुर। यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटर के 1892 अंकपत्र मंगलवार को डीआईओएस दफ्तर से गायब हो गए। सभी अंकपत्र लेडी प्रसन्नजीत इंटर कॉलेज बसडीला, सरदारनगर के हैं। इंटर कॉलेज से अंकपत्र लेने आए कर्मचारी की तहरीर पर राजघाट पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। संयुक्त शिक्षा निदेशक और डीआईओएस ने विभागीय जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है।
घटना मंगलवार की दोपहर करीब दो बजे की है। डीआईओएस दफ्तर के लिपिक से अंक पत्र लेकर कर्मचारी ने एक गत्ते में रखकर बाइक पर बांध दिया। कर्मचारी का कहना है कि वह बाइक स्टैंड के पास खड़ी कर पानी पीने गया था। लौटकर आया तो अंकपत्रों से भरा गत्ता गायब था।
उसने विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों को जानकारी देकर डॉयल-100 पर भी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। कर्मचारी ने इस मामले में अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस मामले को संदिग्ध मानकर जांच कर रही है। विभागीय अधिकारियों को भी परिसर से इस तरह अंकपत्र के गायब होने पर संदेह हो रहा है।
हाईस्कूल के 997 व इंटर के 895 अंकपत्र
गायब हुए कुल 1892 अंकपत्र में 997 हाईस्कूल और 895 इंटरमीडिएट के हैं। इसमें 773 प्राइवेट विद्यार्थी थे। जो दूसरे विद्यालय से पढ़ने वाले हैं उनका केंद्र लेडी प्रसन्न इंटर कॉलेज में आया था। प्राइवेट विद्यार्थियों में 343 हाईस्कूल और 400 इंटर के हैं।
सीसीटीवी कैमरा खराब
अंकपत्रों के गायब होने के बाद जब संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखने की कोशिश की गई तो गेट से स्टैंड की ओर लगा कैमरा ही खराब निकला। डीआईओएस दफ्तर में लगे तीन कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे।
शक की सुई नकल माफियाओं की ओर
लेडी प्रसन्न इंटर कॉलेज परीक्षा के दौरान नकल के लिए चर्चा में था। यहां जांच में बिना परिचय पत्र के प्राइवेट छात्र परीक्षा देते पाए गए थे। यही नहीं भाजपा नेता के विद्यालय योगी पंडित राममूर्ति मेमोरियल पब्लिक इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों का सेंटर भी यहां बना था। भाजपा नेता के विद्यालय पर अधिकारियों के छापे में कापियां बाहर मिली थी और प्रबंधक, प्रधानाचार्य समेत कई लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ऐसे में शक की सुई नकल माफियाओं की ओर भी जा रही है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रथम दृष्टया कर्मचारी की लापरवाही सामने आई है। विभागीय जांच कराकर कार्रवाई होगी।यदि अंकपत्र नहीं मिले तो दूसरी प्रति विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इनका क्रमांक बदला रहेगा।
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया, डीआईओएस गोरखपुर