झंगहा के गजाईकोल पुलिया के पास मंगलवार को दिनदहाड़े पिता-पुत्र की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया है। उधर, बुधवार को भी गांव में तनाव बरकरार रहा। एहतियातन पुलिस और पीएसी बल तैनात रहे। गांव से पुरुष फरार हैं, सिर्फ महिलाएं और बच्चे ही बचे हैं। मंगलवार की देर रात कई घरों में पुलिस बल ने दबिश देकर गिरफ्तारी की कोशिश की।
मृतक जयहिंद के बेटे राममिलन यादव ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 6 जनवरी 2016 को उसके भाई कौशल और चाचा बलवंत की हत्या हुई थी। इसी मामले की पैरवी के लिए मंगलवार को पिता जयहिंद, भाई नागेंद्र तथा वह अपने चाचा जयगोविंद के साथ अलग-अलग बाइक से दीवानी कचहरी गए थे। एक मई 2018 को सुनवाई की अगली तारीख मिली। इस बीच कोर्ट में आए दूसरे पक्ष के लोग सुलह के लिए दबाव बनाने लगे।
पिता ने सुलह से इनकार कर दिया तो विपक्षियों ने हत्या किए जाने की धमकी दी थी। राममिलन ने बताया कि कोर्ट से सभी अलग-अलग बाइक से घर लौट रहे थे। इस बीच चाचा के साथ वह गोबड़ौर चौराहे के पास रुक गए और भाई -पिता आगे निकल लिए। थोड़ी दूर पर ही दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया है।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ केस
राघवेंद्र यादव, प्रधान प्रतिनिधि व अधिवक्ता बसंतलाल यादव, राम दरस, सुदर्शन, रामलखन, शर्मा, राम सजन, संतोष व रमाकांत
लड़की के फेर में फिर बिगड़ गए रिश्ते
बताया जा रहा है कि राघवेंद्र और जयहिंद के बेटों में अच्छी दोस्ती थी। लंबे समय से चला आ रहा चकरोड का विवाद भी शांत हो गया था लेकिन करीब दो साल पहले दोनों परिवारों के बीच एक लड़की की वजह से फिर दरार आ गई। इसके बाद दोनों परिवार के लोग एक दूसरे के जानी दुश्मन हो गए। कुछ समय बाद बलवंत और कौशल की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
भाई और चाचा की हत्या में थे पांच नामजद
राममिलन के भाई कौशल और चाचा बलवंत की हत्या में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। तब राघवेंद्र, बसंतलाल यादव, रामलखन, पप्पू और पन्ने लाल आरोपी बनाए गए थे।
पिता को पांच और बेटे को लगी थी तीन गोली
झंगहा में रिटायर दरोगा जयहिंद यादव और बेटे नागेंद्र यादव का पोस्टमार्टम बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच कराया गया। बदमाशों ने पिता को पांच और बेटे को तीन गोली मारी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक जयहिंद को मारी गईं पांच गोलियों में दो पीठ, दो सीने के पास तथा एक सिर में लगी थी। वहीं नागेंद्र के पीठ में दो और पेट में एक गोली मारी गईं थीं। दोनों के शरीर से एक-एक गोली आर-पार होकर निकल गई थी। बुधवार को पोस्टमार्टम के दौरान बवाल की आशंका को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में फोर्स तैनात रहीं। पोस्टमार्टम के बाद फोर्स शव लेकर मृतक के गांव के पास स्थित राप्ती के तट पर अंत्येष्टि के लिए लेकर गई।
पंचायत ही चलती रही, कार्रवाई न होने से बिगड़े हालात
झंगहा इलाके में पिता-पुत्र की हत्या और उसके बाद हुए बवाल के लिए पुलिस पर उंगलियां उठ रही हैं। चाचा-भतीजा की हत्या के मुख्य आरोपी राघवेंद्र को पुलिस दो साल में नहीं पकड़ सकी और फिर उसी परिवार के दो लोगों की हत्या हो गई। यहीं गुस्सा था कि पुलिस को उलटे पांव न सिर्फ गांव से भागना पड़ा बल्कि ग्रामीणों ने जीप भी फूंक दी। बताया जा रहा है कि दोनों परिवार के बीच चल रही रंजिश में कई बार विवाद हुआ और मामला थाने पर भी गया लेकिन पुलिस ने कार्रवाई की जगह सिर्फ पंचायत की और हालात बिगड़ते चले गए।
6 जनवरी 2016 को जयहिंद के भाई बलवंत और बेटे कौशल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के पीछे गांव में स्थित छोटी सी जमीन के लिए चल रही रंजिश सामने आई थी। मामले में पांच लोग अभियुक्त बनाए गए थे जिसमें से एक आरोपी राघवेंद्र अभी फरार है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि पुलिस ने दो साल पहले हुई हत्या के मामले में सक्रियता दिखाई होती तो मंगलवार को जयहिंद और नागेंद्र यादव की हत्या नहीं हुई होती। पुलिस की प्रथम दृष्टया जांच में भी भूमि विवाद में हत्या का मामला सामने आया है।
राप्ती तट पर एक साथ जली पिता-पुत्र की चिता
झंगहा इलाके के सरार मझगांवा के पास स्थित राप्ती तट पर बुधवार की रात एक साथ पिता-पुत्र की चिता जलाई गई। यह देखकर वहां पर मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। इस दौरान घर से लेकर घाट तक चीख पुकार मची रही। गांव में मातम छाया रहा। घरवाले रात में अंत्येष्टि को तैयार नहीं थे लेकिन पुलिस ने खुद ही लकड़ी आदि की व्यवस्था कराकर अंतिम संस्कार कर दिया। जयगोविंद ने भाई और भतीजे को मुखाग्नि दी।
मंगलवार की शाम चार बजे के करीब रिटायर दरोगा जयहिंद और बेटे नागेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस मंगलवार को ही पोस्टमार्टम कराकर अंत्येष्टि कराना चाहती थी ताकि बवाल न होने पाए। लेकिन रात में पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शाम पौने पांच बजे सीओ कैंपियरगंज के नेतृत्व में गुलरिहा, पिपराइच, खोराबार, झगहां के थानेदार पुलिस लाइंस की फोर्स के साथ शवों को लेकर गांव पहुंचे। गांव पहुंचते ही एक बार फिर चीख पुकार मच गई और परिवार के लोगों ने अंतिम संस्कार अगले दिन सुबह करने को कहा। इस बीच कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस शव को फिर घाट पर ले गई और खुद ही लकड़ी की व्यवस्था कर मृतक के बेटे को लाया गया और अंत्येष्टि कराई गई।
कई घरों में नहीं जला चूल्हा
पिता-पुत्र की हत्या के बाद से गांव का माहौल गमगीन है। जयहिंद के परिवार के से करीबी रिश्ता रखने वाले कई घरों में बुधवार को भी चूल्हा नहीं जला। सभी जयहिंद के घर पहुंचकर परिवार वालों को ढांढस बंधाते रहे।
एक दिन में हुईं थीं 11 हत्याएं
झंगहा इलाके में पूरे जिले को झकझोरने वाली कई आपराधिक घटनाएं हो चुकी हैं। बीते 25 सालों में यहां कई डबल मर्डर समेत 30 से अधिक हत्याएं हुई हैं। ढाई दशक पहले झंगहा क्षेत्र के खैरखूटा गांव निवासी तत्कालीन प्रधान बाबूराम की हत्या कर दी गई थी। 1993 में झंगहा क्षेत्र के बौठा गांव की घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी। तब रामसकल और शिवसकल यादव की हत्या के प्रतिशोध में एक दिन में 11 हत्याएं हुईं थी। वर्ष 1997-98 में रामभवन की हत्या के बाद भी काफी विवाद हुआ था। वर्ष 1999 में अमारी निवासी तत्कालीन प्रधान की हत्या कर दी गई थी। 2001 अमारी के अशोक यादव की हत्या ने भी सुर्खिंयां बटोरीं। खैरखूटा गांव निवासी भूमिधर यादव की भी मनबढ़ों ने गोली मारकर हत्या की थी। अमडीहा में दो लोगों की हत्याएं हुईं तो जंगल रसूलपुर में भी दो लोगों को गोलियों से भून दिया गया था।