भाजपा सांसद कमलेश पासवान, उनके कारोबारी पार्टनर सतीश नांगलिया समेत पांच लोगों पर दर्ज जालसाजी के केस की विवेचना अब क्राइम ब्रांच करेगी। एडीजी/आईजी जय नारायण सिंह के आदेश पर विवेचना स्थानांतरित की गई है। इसके पहले वादी ने मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर जांच विजिलेंस या भ्रष्टाचार निवारण से कराए जाने की सिफारिश की थी।
गोरखपुर पुलिस की ओर से इसके लिए हरी झंडी भी दी गई मगर शासन की ओर से पहल नहीं हो सकी थी। इसी बीच वादी ने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था जिसके बाद जांच क्राइम ब्रांच को हस्तांतरित कर दी गई है।
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में दिए गए प्रार्थना पत्र के मुताबिक कैंट थाने में अपराध संख्या (1041/2018) के तहत सांसद समेत पांच लोगों पर जालसाजी, आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया। 29 अप्रैल 2019 को मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र देने के बाद जांच शुरू हुई और एसएसपी को कार्रवाई करने के लिए आदेश दिया गया। विजिलेंस या भ्रष्टाचार अधिनियम में स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं होने की वजह से इस पर पुलिस ने अनापत्ति रिपोर्ट लगा दी ताकि केस हैंडओवर किया जा सके।
फिर 11 जून को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने पर एसएसपी ने सीओ कैंट को जांच दी मगर आज तक फाइल रिपोर्ट नहीं भेजी गई। अब वादी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रमुख सचिव गृह को निर्देशित कर जांच विजिलेंस या भ्रष्टाचार अधिनियम से कराई जाए। इसी बीच आईजी के आदेश पर विवेचना स्थानांतरित कर दी गई है। एडीजी/आईजी जय नारायण सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
यह है मामला
आठ दिसंबर 2018 को कैंट थाने में गोलघर स्थित बलदेव प्लाजा की जमीन रजिस्ट्री फर्जी दस्तावेज के सहारे कराने की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर बांसगांव से भाजपा सांसद कमलेश पासवान, उनके कारोबारी पार्टनर सतीश नांगलिया, सुधा प्रसाद, कौस्तुभ प्रसाद और कंदर्प प्रसाद पर जालसाजी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने व अन्य आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
आरोप था कि नई दिल्ली के नीतिबाग निवासी योगेश्वर प्रसाद की पत्नी सुधा प्रसाद और उनके बेटे कौस्तुभ प्रसाद व कंदर्प प्रसाद ने फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज के सहारे जमीन अपने नाम करानी चाही। 21 अप्रैल 1999 को तत्कालीन एसडीएम सदर मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा की गई जांच में भी भूखंड का स्वामी नरेंद्र के पिता स्व. फुद्दी सिंह को ही पाया गया।
इसके बावजूद तीनों लोगों ने खुद को मालिक दर्शाते हुए उसे बेचने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि कृष्णा डेवलपर्स फर्म के पार्टनर मेडिकल कालेज जेमिनी रेजीडेंस निवासी सतीश नांगलिया और उनके दूसरे पार्टनर मेडिकल कालेज के उत्तरी गेट स्थित पासवान भवन निवासी कमलेश पासवान द्वारा जानबूझकर कूटरचित और फर्जी दस्तावेज के सहारे जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई।