सांसद महंत आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर में एम्स के निर्माण में प्रदेश सरकार स्वयं बाधा बनी हुई है। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक सरकार ने जमीन का कोई ठोस प्र्रस्ताव केंद्र सरकार को नहीं सौंपा है। जिस भूमि का प्र्रस्ताव भेजा गया था, उस पर उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश है।
प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार गुमराह करने वाला बयान दे रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार एम्स के लिए फरवरी 2015 से जमीन मांग रही है। 28-29 अप्रैल को केंद्रीय दल ने एम्स के लिए जिले का दौरा किया था। 27 जुलाई व 20 अगस्त 2015 को भारत सरकार के सचिव ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव को एम्स के लिए भूमि के प्रस्ताव में तेजी लाने को कहा था। इतना ही नहीं, 24 दिसंबर 2015 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री को स्पष्ट जमीन संबंधी प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया था। दुर्भाग्य की बात है कि स्थानीय प्रशासन ने मुख्यमंत्री को भी अंधेरे में रखा है, जिससे मुख्यमंत्री पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता को गुमराह करने वाला बयान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के कार्यकाल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान खोलने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए नियमावली तय की गई थी। इसमें राज्य सरकाराें को 200 एकड़ भूमि उपलब्ध कराना, फोरलेन कनेक्टिविटी तथा विद्युत एवं जलापूर्ति सुनिश्चित कराना शामिल था। प्रधानमंत्री ने गोरखपुर में एम्स के लिए हरी झंडी दे दी, बावजूद इसके प्रदेश सरकार गुमराह कर रही है।
सांसद ने कहा कि सरकार की वजह से तमाम परियोजनाएं लंबित पड़ी हैं। सात वर्ष पूर्व धन मिलने के बाद भी महेसरा पुल का कार्य लटका पड़ा है। गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर अभी तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं पूरी हो सकी। इस नाते कार्य नहीं हो पा रहा है। यह तो उदाहरण है, जबकि दर्जनों परियोजनाएं राज्य सरकार की वजह से लटकी पड़ी हैं।