गोरखपुर। महात्मा गांधी पीजी कालेज में भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेकभनोलॉजी की ओर से इंस्पायर इंटर्नशिप कैंप का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान विद्यार्थियों को विज्ञान को रोचक ढंग से बताकर उनमें विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने की कोशिश की जा रही है। सोमवार को कैंप के दौरान आईआईटी कानपुर की प्रो. पदमा एस वानकर ने कहा कि आचार, मुरब्बा अथवा अन्य खाद्य सामग्रियों में नमक का प्रयोग प्रिजर्वेटिव के रूप में किया जाता है। जिससे फं गल आसमोसिस के कारण आचार अथवा मुरब्बे में फ फूंदी नही लग पाती और इसे ज्यादा समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसी प्रकार छोटे बच्चों और एथलीट्स को नमक की कमी अधिक होने कारण हाइपोएटरीमिया की संभावना बनी रहती है, जिसे नमक के घोल का प्रयोग करके बचाया जा सकता है। एमिटी विश्वविद्यालय के बायोटेक्नॉलजी विभाग के डॉ. जेके श्रीवास्तव ने बताया कि आंत के भीतर के परजीवियों के कारण अनेक घातक बीमारियां अत्यंत सामान्य रूप धारण करती जा रही हैं। आंतों के भीतर, पिनवर्म, हूकवर्म, टेपवर्म अन्य कृमि के कारण जानलेवा बीमारियां अत्यंत सामान्य हो गयी हैं। आंतों के भीतर पलने वाले कृमियों के कारण होने वाली बीमारी दिखाई नहीं पड़ती। इसलिए भी हम इससे अंजान रहते हैं। सब्जियों को धुलकर पकाने, शौच के बाद हाथ की सफाई आदि के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए कहा कि कृमि परजीवी का संक्रमण हर स्थिति में रोका जाना चाहिए। डॉ. विजय कुमार श्रीवास्तव ने सिंथेटिक दूध, टूथपेस्ट अन्य दैनिक जीवन से संबंधित सामग्रियों के बनाने और उसके पहचान की जानकारी दी। कार्यक्रम में समन्वयक डॉ. सविता रानी सिंह, महाविद्यालय के प्रबंधक प्रेम नरायन श्रीवास्तव, प्राचार्य डॉ. शीराज़ अहमद वजीह, डॉ. अशोक कुमार श्रीवास्तव, डॉ. गोपाल जी श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।