बांसी(सिद्धार्थनगर)। राजस्व अभिलेखों में हेर-फेर कर सवा करोड़ रुपये मुआवजा लेेने के मामले में आरोपी पर केस दर्ज करा दिया गया है। मगर, सबसे बड़ा सवाल है कि इस मामले में किसी भी कर्मी पर कार्रवाई न होना सवाल खड़े कर रहा है। क्योंकि ऐसी गड़बड़ी बिना किसी कर्मी की मिली भगत के संभव ही नहीं है। रुधौली-ककरहवा तक सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहीत की गई है। मुख्य मार्ग से सटे राजस्व गांव गोड़ियाजोत तप्पा असनार में अली हुसैन, मोहम्मद, नूर मोहम्मद, अब्दुल रसीद के नाम से 0.1640 हेक्टेयर भूमि को राजस्व रिकार्ड में बांसी के राजेंद्रनगर निवासी मो. शमीम ने फर्जी ढंग से अपने नाम दर्ज करा दिया। अधिग्रहण के एवज में भूमि अध्याप्ति विभाग ने शमीम को 1.23 करोड़ रुपये मुआवजा भी दे दिया। वास्तविक भू-स्वामियों की शिकायत के बाद जांच हुई तो सच्चाई सामने आ गई। एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को बांसी कोतवाली में शमीम के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया गया है। सूत्रों की मानें तो राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ बिना विभागीय कर्मचारियों की संलिप्पतता के संभव नहीं है। किसी भी भूमि का संपूर्ण रिकार्ड तहसील कार्यालय में होता है। बिना राजस्व कर्मी की रिपोर्ट के दूसरे का नाम अंकित नहीं किया जाता। यहां तक कि मुआवजे के प्रपत्र तैयार करते समय भी विभिन्न अभिलेखों की कई स्तरों पर पड़ताल होती है। बावजूद किसी भी स्तर पर जालसाजी न पकड़ आने से कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लाजिमी है। एसडीएम बांसी प्रबुद्ध सिंह का कहना है कि केस भूमि अध्याप्ति विभाग की ओर से दर्ज कराया गया है। जहां तक कर्मचारियों की संलिप्तता का सवाल है तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फर्जीवाड़े में शामिल किसी को नहीं बख्शा जाएगा।