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बढ़नी में नहीं निकला ताजिया जुलूस

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बढ़नी(सिद्धार्थनगर)। मोहर्रम पर कस्बे में ताजिया जुलूस निकालने की परंपरा इस बार टूट गई। प्रशासन की लापरवाही से क्षुब्ध ताजियादारों ने न तो चौक पर ताजिया रखा और न ही जुलूस लेकर कर्बला गए। घर में ही फातिहा पढ़ रस्म अदायगी कर ली। ताजिया जुलूस न निकलने से लोगों में प्रशासन के प्रति गुस्सा है। आरोप है कि अगर प्रशासन ने थोड़ी सक्रियता दिखाई होती तो यह परंपरा नहीं टूटती। कस्बे के रामलीला मैदान की ओर जाने वाले मार्ग पर मुस्लिम समुदाय की आबादी है। विसर्जन से पूर्व मां दुर्गा की प्रतिमाओं को रामलीला मैदान में एकत्रित किया जाता है, फिर यहां से प्रतिमाएं चरगहवा नदी की ओर रवाना की जाती हैं। दसवीं मोहर्रम से पहले मोहल्ले के लोग इसी मार्ग पर ताजिया रखते हैं। इस बार दशहरा व मोहर्रम एक साथ होने के चलते प्रशासन ने शांति समिति की बैठक में तय किया था कि ताजिया रखने से पहले ही मार्ग को खाली करा दिया जाएगा। शनिवार को जब विसर्जन का क्रम शुरू हुआ तो देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ मार्ग पर बनी रही। रात 12 बजे तो ताजियादार भड़क गए और परंपरा का हवाला देते हुए ताजिया निकालने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि रात 12 बजे के बाद ताजिया नहीं रखा जा सकता। प्रशासन ने इस समय से पहले तक रास्ता खाली कराने का वादा किया था, लेकिन उनकी लापरवाही से तय समय तक मार्ग खाली नहीं हुआ। लिहाजा वह ताजिया जुलूस नहीं निकालेंगे। सूचना पाकर एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह, सीओ शिव सिंह मौके पर ताजियादारों को मनाने की कोशिश में जुट गए। काफी मशक्कत के बाद भी तय समय से पहले ताजिया न रख पाने की विवशता जताते हुए ताजिया जुलूस निकालने से साफ इनकार कर दिया। अंत में घर में लोगों ने फातिहा पढ़ा और मुहर्रम की रस्म अदायगी की। मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रशासन पर जानबूझकर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। विरोध स्वरूप इस बार जुलूस नहीं निकाला गया। उधर, एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह व सीओ शिव सिंह ने तय समय तक रास्ता खाली न करा पाने पर खेद जताया। कहा कि प्रशासन ने पूरा प्रयास किया, लेकिन महिलाओं-बच्चों की भीड़ अधिक होने के चलते सख्ती नहीं की जा सकी।
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