गोरखपुर। आरपीएफ ने संजीदगी दिखाते हुए यात्रियों के बीच अपनी छवि बदली है। अब आरपीएफ के जवान न सिर्फ पीड़ितों की शिकायतों पर कार्रवाई कर रहे हैं बल्कि ट्रेन और स्टेशन परिसर में भूले भटके बच्चों को घरवालों तक पहुंचाकर अपनी संवेदनशीलता भी दिखाई है। बात करें तो बीते तीन-चार दिनों की तो गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर ही छह किशोरों की मददगार बन उनके घर वालों से मिलाया है जबकि ट्रेन में चढ़ते वक्ता पिता से बिछड़े एक बच्चे की तत्काल सूचना प्रसारित कराकर पिता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई है। यही नहीं बच्चों का बाकायदा काउंसिलिंग भी कराई गई है। वहीं घर का पता और मोबाइल नंबर नहीं बता पाने पर एक लड़के को चाइल्ड लाइन को सौंपा है।
केस एक
रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म चार पर एक नवंबर को 11 वर्ष के एक लड़के को काफी देर से आरपीएफ के एक जवान घूमते देखा। लड़के को रोक कर जब पूछताछ की तो वह थोड़ा मानसिक रूप से परेशान दिखा। वह नाम और पता भी ठीक से नहीं बता सका। आरपीएफ ने सुपर्दगीनामा बनाकर उसे चाइल्ड लाइन को सौंप दिया।
केस दो
एक नवंबर को आरपीएफ के रिजर्व कंपनी के हेड कांस्टेबल को गोरखधाम एक्सप्रेस में 10 वर्ष का एक लड़का लावारिस हालत में मिला। पूछताछ करने पर लड़के ने बताया कि गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय वह पिता से बिछड़ गया। इसकी सूचना स्टेशन के एनाउंस सिस्टम से प्रसारित कराई गई। सूचना सुनकर लड़के के पिता आ गए। आरपीएफ ने कागजी कार्रवाई कर लड़के को उन्हेें सौंप दिया।
केस तीन
30 नवंबर को आरपीएफ के हेड कांस्टेबल ने रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म छह पर गश्त के दौरान को 15 वर्ष के एक लड़के को लावारिस हालत में घूमते देखा। पूछताछ करने पर वह घरवालों का मोबाइल नंबर नहीं बता पाया। आरपीएफ ने उसे कागजी कार्रवाई के बाद चाइल्ड लाइन को सौंप दिया।