संतकबीरनगर।जिले में विद्युत कटौती चरम पर है। इस अघोषित कटौती से लोग परेशान है। सर्वाधिक दिक्कत रात की कटौती से है। कारण की उमस भरी गर्मी में लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है।प्रदेश सरकार का निर्देश है कि तहसील मुख्यालयों को 20 घंटे व ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे बिजली की आपूर्ति की जाए। लेकिन अब स्थिति इससे इतर है। शहर हो या गांव हर तरफ बिजली कटौती के चलते हाहाकार मचा हुआ है। तहसील मुख्यालयों को बीस घंटे की बजाय आठ से दस घंटे ही विद्युत आपूर्ति मिल ही है, वह भी कई किस्तों में। सबसे गंभीर स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है। पिछले कई दिनों से बारिश नहीं हुई है, ऐसे में धान की सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत है, लेकिन बिजली की अघोषित कटौती के कारण किसानों की नींद उड़ गई है। धान की फसल बचाने के लिए किसान महंगे डीजल खरीदकर निजी संसाधनों से किसी प्रकार सिंचाई कर रहे हैं। यही नहीं रात्रिकालीन कटौती के कारण लोग रातभर उमस भरी गर्मी में बेहाल है। लोगों की नींद भी पूरी नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर आलोक सिन्हा ने बताया कि बिजली कटौती के कारण नींद पूरा न होने से लोगों को तमाम तरह की दिक्कतें हो रही है। उन्होंने बताया कि नींद पूरा न होने से लोगों में चिड़चिड़ापन, सिरदर्द की समस्या हो रही है। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्र के निवासी राम करन, दिनेश कुमार,घनश्याम पांडेय आदि ने कहा कि बिजली की कटौती बंद होनी चाहिए। बिजली कब आएंगी और कब जाएंगी, कुछ पता नहीं रहता है। विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता संजय कुमार ने कहा कि स्थानीय स्तर से कटौती नहीं हो रही है, बल्कि ऊपर से जो निर्देश आ रहे हैं, उसी के आधार पर बिजली कटौती हो रही है। जहां तक लोकल फाल्ट की बात है तो इसे दूर करने के निर्देश कर्मचारियों को दिए गए हैं।