गोरखपुर। आजादी के जश्न में हर किसी को राष्ट्रीय ध्वज फ हराने की छूट है मगर ध्यान रखें तिरंगे का अनादर न हो वर्ना जेल तक हो सकती है। जेल की अवधि तीन साल तक बढ़ाई जा सकती है या जुर्माना लगाया जा सकता है या फिर दोनों हो सकते हैं। तिरंगे के मान-सम्मान के लिए भारतीय ध्वज संहिता नाम का कानून है। इसमें नियम-कायदे तय किए गए हैं।
तिरंगा फहराने का सही तरीका
तिरंगा कॉटन, सिल्क या फिर खादी का ही होना चाहिए। प्लास्टिक के झंडे पर रोक है।
किसी भी दशा में फटे या क्षतिग्रस्त झंडा नहीं फहरा सकते
तिरंगे आयताकार होना चाहिए, जिसका अनुपात 3:2 ही हो
झंडे का इस्तेमाल यूनिफ ॉर्म या सजावट के सामान में नहीं हो सकता
झंडे पर कुछ भी बनाना या लिखना गैरकानूनी है
किसी भी गाड़ी के पीछे, बोट या प्लेन में तिरंगे का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। किसी इमारत को ढकने में भी नहीं हो सकता
किसी भी दशा में तिरंगा जमीन से नहीं छूना चाहिए
जब तिरंगा फ ट जाए या रंग उड़ जाए तो इसे फ हराया नहीं जा सकता
जब तिरंगा फ ट जाता है तब उसे गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या पवित्र नदी में जल समाधि दे दी जाती है
झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है
किसी भी दूसरे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा या ऊपर नहीं लगाया जा सकता न ही बराबर रखा जा सकता है
शहीद के पार्थिव शरीर से उतारे गए झंडे को भी गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या नदी में जल समाधि दे दी जाती है।