हैंसर(संतकबीरनगर)। वो घर ही क्या जहां बचपन का शोर न हो, बच्चों की हंसी-ठिठोली और बचपना न हो...। परिवार की खुशियां तो बच्चों में ही बसती हैं। मगर, विडंबना यह है कि इलाके के कुछ परिवार इस खुशी से बेवजह ही महरूम हो गए हैं। उनका घर महज बेजान ईंट-पत्थरों का घेरा बन चुका है और खुशियां उनसे रूठ गई हैं। पथराई आंखों से अपने मासूमों का इंतजार कर रहे इनके माता-पिता को भी नहीं पता कि आखिर ऐसा हुआ क्यों। धनघटा क्षेत्र से एक माह के भीतर तीन बच्चे अचानक लापता हो चुके हैं। पुलिस भी इनका अब तक पता नहीं लगा सकी है। और तो और पांच साल पहले बगही गांव से लापता हुए मनीष (13) का आज तक कोई सुराग ही नहीं लगा। दूलमपुर गांव निवासी रामवृक्ष का बेटा रोहित (14) और रामअशोक का पुत्र आकाश (13) बीते 14 दिसंबर को घर से स्कूल जाने के लिए निकले और आज तक घर नहीं लौटे। तभी से इन दोनों किशोरों की तलाश में उनके परिवार के लोग भटक रहे हैं, लेकिन उनका कुछ पता नहीं। नावन खुर्द गांव के इरसादुल्लाह का पुत्र मुहम्मद शफीक (नौ) 31 दिसंबर को गांव में खेलने के लिए निकला और फिर आज तक घर नहीं लौटा। दियारा क्षेत्र से बच्चों के लापता होने की घटनाओं का खुलासा करने में पुलिस भी पूरी तरह नाकाम रही है। उनके परिजन एक-एक दिन किस हाल में गुजार रहे हैं, ये तो वही समझ सकते हैं। एसओ प्रदीप सिंह का कहना है कि बच्चों के लापता होने के मामले में गुमशुदगी दर्ज की गई है। उनकी तलाश की जा रही है। इससे पहले बगही गांव निवासी परमात्मा यादव का बेटा मनीष यादव (13) 13 अप्रैल, 2013 को घर से सरयू नदी के बिड़हर घाट पर स्नान करने के लिए निकला था। वापसी में वह उमरिया बाजार तक देखा गया, उसके बाद नहीं दिखा। घर वालों ने हर जगह उसकी तलाश की पर मनीष नहीं मिला। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों के खिलाफ अपहरण का नामजद केस दर्ज किया। इतना ही नहीं, मनीष के लापता होने का मामला विधानसभा तक गूंजा, बावजूद इसके मनीष आज तक लापता है।